Nutrition Tips: डाइट में फाइबर की कमी पड़ सकती है भारी, कब्ज से लेकर ब्लड शुगर और हार्ट हेल्थ तक पर पड़ सकता है असर

आजकल बदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान की वजह से कई लोगों की डाइट में फाइबर की कमी हो सकती है। शरीर को ठीक से काम करने के लिए फाइबर समेत कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। फाइबर एक तरह का कार्बोहाइड्रेट है, जिसे शरीर पूरी तरह पचा नहीं पाता। इसकी कमी से कब्ज, पेट फूलना और पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

उम्र के हिसाब से फाइबर की जरूरत

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 50 साल या उससे कम उम्र की महिलाओं को रोज करीब 25 ग्राम और पुरुषों को 38 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। 50 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए करीब 21 ग्राम और पुरुषों के लिए 30 ग्राम फाइबर की जरूरत बताई जाती है। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत अलग हो सकती है। फाइबर को डाइट में धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर माना जाता है।

कब्ज और पाचन में मिल सकती है राहत

फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। यह आंतों तक पहुंचकर मल को नरम और भारी बनाने में मदद कर सकता है, जिससे मल आसानी से बाहर निकलता है। इससे कब्ज की परेशानी कम हो सकती है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखने में भी मदद करता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है और वजन मैनेज करने में मदद मिल सकती है।

ब्लड शुगर और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद

कुछ तरह का फाइबर पानी में घुलकर जेल जैसा बन जाता है। इससे पाचन की प्रक्रिया धीमी हो सकती है और खाने के बाद ब्लड शुगर बढ़ने की रफ्तार कम हो सकती है। कुछ घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल कम करने में भी मदद कर सकते हैं। इसलिए पर्याप्त फाइबर लेना पाचन के साथ ब्लड शुगर और हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

फल सब्जियों और दालों से मिलेगा फाइबर

फाइबर मुख्य रूप से पौधों से मिलने वाली चीजों में पाया जाता है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, मटर, नट्स और सीड्स इसके अच्छे स्रोत हैं। एक मध्यम नाशपाती में करीब 5.5 ग्राम, सेब में 4.4 ग्राम और एक कप रास्पबेरी में करीब 8 ग्राम फाइबर हो सकता है। एक कप पकी दाल में लगभग 15.6 ग्राम फाइबर मिल सकता है।

फाइबर बढ़ाएं लेकिन पानी भी खूब पिएं

डाइट में फाइबर की मात्रा अचानक बढ़ाने से गैस, पेट फूलना और ऐंठन जैसी परेशानी हो सकती है। इसलिए इसे धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दाल और बीन्स नियमित डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। अगर किसी को आंतों से जुड़ी बीमारी है या डॉक्टर ने कम फाइबर लेने को कहा है, तो डाइट बदलने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।

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Author: The Hindi Post