Sawan Somwar पर नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग, 23 साल बाद 17 अगस्त को मिलेगा पूजा का खास मौका

सावन का तीसरा सोमवार इस बार बेहद खास माना जा रहा है। 17 अगस्त 2026 को सावन सोमवार के साथ नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करीब 23 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है। इस वजह से भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने वाले भक्तों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।

सावन सोमवार पर शिव पूजा की विशेष परंपरा

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान सोमवार को व्रत रखने और शिवलिंग का जलाभिषेक करने की परंपरा है। भक्त सुबह स्नान के बाद भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

एक ही दिन नाग पंचमी और सावन सोमवार

17 अगस्त को नाग पंचमी भी पड़ रही है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। हिंदू मान्यताओं में नागों का भगवान शिव से विशेष संबंध माना गया है, क्योंकि शिवजी के गले में नागराज विराजमान हैं। ऐसे में दोनों पर्व एक साथ पड़ने से इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

23 साल बाद बना ऐसा संयोग

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह संयोग करीब 23 साल बाद बन रहा है। यही कारण है कि इस दिन को सामान्य सावन सोमवार से अधिक खास माना जा रहा है। श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत, जलाभिषेक और भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा कर सकते हैं।

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद शिव मंदिर या घर के मंदिर में भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर जल और गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद दूध, दही और शहद से अभिषेक करने की परंपरा है। बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप और शिव चालीसा का पाठ किया जा सकता है।

इस खास दिन दान करना भी शुभ

सावन सोमवार और नाग पंचमी के इस संयोग पर शिव मंदिर में जलाभिषेक और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर सकते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, कपड़े या उपयोगी सामान का दान भी किया जा सकता है। मान्यता है कि ऐसे धार्मिक कार्यों से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

The Hindi Post
Author: The Hindi Post