
Pitru Paksha 2025: श्राद्ध सिर्फ मृतकों का नहीं, जीवित भी कर सकते हैं अपना कर्मकांड, गया में मिलता है विशेष महत्व
श्राद्ध का नाम सुनते ही मन में पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना का भाव जागता है। आम तौर पर श्राद्ध केवल

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आज के समय में हार्ट अटैक सबसे बड़ी स्वास्थ्य चिंताओं में से एक बन चुका है। यह सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर

मलयालम सिनेमा के लिए यह साल बेहद खास साबित हो रहा है। इस साल आई ‘लोका चैप्टर 1’ ने वो कर दिखाया है, जिसकी किसी

स्मार्टफोन आज हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. कॉल, मैसेज, इंटरनेट से लेकर पेमेंट तक हर काम में स्मार्टफोन ज़रूरी हो गया है.

राजधानी इंफाल में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “मणिपुर को शांति और विकास के पथ पर ले जाना

एशिया कप 2025 का रोमांच अपने चरम पर है. टीम इंडिया अपने दूसरे मैच में 14 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान

आज की भागदौड़ भरी और कंपटीशन से भरी लाइफस्टाइल में तनाव और चिंता आम हो गए हैं। कई बार यही तनाव इतना बढ़ जाता है

हर साल अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाता है। यह व्रत खासतौर पर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश

सोशल मीडिया पर इस वक्त एक अजब-गजब ट्रेंड ने धमाल मचा दिया है- Google Nano Banana AI Figurine. इन्फ्लुएंसर से लेकर आम यूज़र तक हर

पितृपक्ष का समय केवल कर्मकांड का अवसर नहीं, बल्कि पितरों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का पर्व है। शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि श्राद्ध