Bihar Elections 2025: तेजस्वी यादव के गढ़ में प्रशांत किशोर की रणनीति, राघोपुर सीट पर हाईप्रोफाइल मुकाबला

बिहार चुनाव 2025 में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) के राघोपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, इसको लेकर जनसुराज की टीम ने कमर कस ली है। शनिवार (11 अक्टूबर) को पीके राघोपुर में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे। माना जा रहा है कि इसी कार्यक्रम के बाद उनकी उम्मीदवारी का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। गौरतलब है कि राघोपुर सीट से इस समय राजद नेता तेजस्वी यादव विधायक हैं।

जनसुराज ने शुरू की तैयारी

जनसुराज से जुड़े सूत्र बताते हैं कि प्रशांत किशोर ने चुनाव लड़ने का मन बना लिया है और अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, राघोपुर सीट पर 6 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर को मतगणना होगी। ऐसे में पीके की टीम ने बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है।

राघोपुर क्यों चुना पीके ने?

राघोपुर को लालू परिवार का गढ़ माना जाता है। यहां से लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव तीनों ही विधानसभा तक पहुंच चुके हैं। तेजस्वी यादव विपक्षी गठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे हैं, इसलिए पीके सीधे तेजस्वी को उनके गढ़ में चुनौती देकर बड़ा संदेश देना चाहते हैं।

पीके का यह कदम ‘ममता मॉडल’ से प्रेरित बताया जा रहा है। जैसे ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी को उनके नंदीग्राम क्षेत्र में चुनौती दी थी, वैसे ही पीके तेजस्वी को राघोपुर में घेरना चाहते हैं।

जातीय समीकरण पीके के पक्ष में

राघोपुर का जातीय गणित भी पीके के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। यहां यादव समुदाय करीब 32% है, जबकि राजपूत और पासवान समुदाय लगभग 25% वोट शेयर रखते हैं। इसके अलावा ब्राह्मण, दलित और अन्य पिछड़े वर्ग मिलाकर शेष 43% मतदाता हैं। पीके की रणनीति इस सीट को “यादव बनाम बाकी सभी” मुकाबले में बदलने की है।

चुनाव लड़ना पीके के लिए मजबूरी भी

प्रशांत किशोर कई बार यह कह चुके हैं कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति को चुनाव लड़ना चाहिए। वे खुद नीतीश कुमार के चुनाव न लड़ने को लेकर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में अगर वे खुद मैदान में नहीं उतरते, तो उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। यही वजह है कि वे शुरू से ही चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे थे। पहले उन्होंने राघोपुर या करगहर से चुनाव लड़ने की बात कही थी। अब करगहर सीट से जनसुराज ने रितेश पांडेय को टिकट दिया है।

राघोपुर का सियासी इतिहास

वैशाली जिले की राघोपुर सीट को ‘यादव लैंड’ कहा जाता है। 1980 से लेकर अब तक अधिकतर चुनाव यादव समुदाय के नेताओं ने जीते हैं। 1995 से इस सीट पर लगभग लालू परिवार का वर्चस्व रहा है। इस क्षेत्र से जीतकर लालू यादव और राबड़ी देवी मुख्यमंत्री, जबकि तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं। यही कारण है कि राघोपुर को बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक माना जाता है।

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Author: The Hindi Post