80 के दशक के आखिरी वर्षों में दो धारावाहिकों ने पूरे भारत को अपनी कहानियों में बांध लिया था, ‘रामायण’ और ‘महाभारत’। ये दोनों शोज़ आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हैं। अब इन्हीं में से एक, यानी महाभारत फिर से टीवी पर वापसी करने जा रहा है। लेकिन इस बार कहानी वही होगी, रूप बिल्कुल नया, क्योंकि यह एआई (Artificial Intelligence) आधारित महाभारत होगी। इसकी घोषणा 10 अक्टूबर को कलेक्टिव मीडिया नेटवर्क ने की।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की पहल
कलेक्टिव मीडिया नेटवर्क का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत की नई और युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, सभ्यता और परंपरा से जोड़ना है। ताकि वे अपने गौरवशाली अतीत और भारतीय महाकाव्यों के बारे में जान सकें। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए महाभारत को आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल इफेक्ट्स के साथ एआई फॉर्मेट में तैयार किया गया है। इसके पोस्टर भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे दर्शकों में उत्सुकता और बढ़ गई है।
पहले ओटीटी पर मचाएगा धूम
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने जानकारी दी है कि यह एआई बेस्ड महाभारत सबसे पहले ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘WAVES’ पर स्ट्रीम होगी। यह प्लेटफॉर्म प्रसार भारती का ऑफिशियल ओटीटी नेटवर्क है। दर्शक 25 अक्टूबर 2025, यानी दिवाली के तुरंत बाद, इस सीरीज को देख पाएंगे। इससे पहले कभी भी किसी भारतीय महाकाव्य को इस तरह एआई तकनीक से पेश नहीं किया गया है, इसलिए इसे लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है।
प्रसार भारती के सीईओ ने बताई खास बात
प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी ने कहा कि, “प्रसार भारती हमेशा से ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देता रहा है जो राष्ट्र और संस्कृति से जुड़ा हो। लॉकडाउन के दौरान मूल महाभारत के दोबारा प्रसारण ने दिखाया कि यह कथा परिवारों और पीढ़ियों को जोड़ती है। अब यह नया रूप दर्शकों को महाभारत की गहराई को आधुनिक तरीके से अनुभव करने का मौका देगा।”
टीवी पर 2 नवंबर से होगी शुरुआत
ओटीटी रिलीज के एक हफ्ते बाद ही 2 नवंबर 2025 से यह महाभारत दूरदर्शन पर भी प्रसारित की जाएगी। दर्शक हर रविवार सुबह 11 बजे इसे अपने घरों में देख सकेंगे। यानी पुराने दर्शकों के लिए भी nostalgia और नए दर्शकों के लिए एक तकनीकी चमत्कार का अनुभव होगा।
“भक्ति और प्रगति का संगम”
कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क के संस्थापक विजय सुब्रमण्यम ने कहा, “महाभारत को नए अवतार में पेश करना सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भक्ति और प्रगति का संगम है। यह परंपरा में जड़ें रखते हुए भी भविष्य की ओर साहसपूर्वक बढ़ने का प्रतीक है।”