हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी व्रत मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ पर्व 13 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को मनाया जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से संतान की दीर्घायु और सुख की कामना के लिए किया जाता है। महिलाएं इस दिन अहोई माता की पूजा करती हैं और संतान की मंगलकामना हेतु व्रत रखती हैं। इस दिन मथुरा के राधा कुंड में स्नान करने की परंपरा बेहद पवित्र मानी जाती है।
राधा कुंड स्नान की परंपरा
अहोई अष्टमी के दिन मथुरा स्थित राधा कुंड में स्नान करने की परंपरा सदियों पुरानी और अत्यंत पवित्र मानी जाती है। देशभर से हजारों भक्त इस अवसर पर मथुरा पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन राधा कुंड में स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भक्त आधी रात को कुंड के जल में डुबकी लगाकर राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कई दंपत्ति, जिनकी संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है, बाद में दोबारा यहां आकर धन्यवाद स्वरूप स्नान करते हैं।
राधा कुंड स्नान के लाभ
1. संतान प्राप्ति:
ऐसा विश्वास है कि अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड में स्नान करने से निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त होता है। इसीलिए देशभर से महिलाएं इस दिन राधा कुंड स्नान के लिए आती हैं।
2. मनोकामनाओं की पूर्ति:
कहा जाता है कि राधा कुंड में स्नान करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं और जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। यह स्नान आत्मिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।
3. पापों से मुक्ति:
धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा कुंड में स्नान करने से व्यक्ति गौ हत्या जैसे महापापों से भी मुक्त हो जाता है। इसे आत्मशुद्धि का प्रतीक माना गया है।
4. राधा-कृष्ण की कृपा:
इस पवित्र जल में स्नान करने से भक्तों पर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा बरसती है, जिससे जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है।
राधा कुंड स्नान की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने अरिष्टासुर नामक राक्षस का वध किया। यह राक्षस बैल के रूप में आया था, इसलिए श्रीकृष्ण पर गौ हत्या का दोष लग गया। इस पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने अपनी बांसुरी से भूमि खोदकर एक कुंड बनाया और उसमें स्नान किया। बाद में राधा रानी ने अपने कंगन से दूसरा कुंड खोदा और उसमें स्नान किया। यही कुंड बाद में राधा कुंड और श्याम कुंड कहलाए। कहा जाता है कि अहोई अष्टमी के दिन ही इन कुंडों का निर्माण हुआ था, इसलिए इस तिथि पर स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है।