बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस फैसले से छात्रों, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा। बैठक में कुल 129 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और कर्मचारियों से जुड़े बड़े निर्णय शामिल रहे।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला सातवें वेतनमान की बढ़ोतरी लागू करने का रहा। इसके अलावा महंगाई भत्ते (DA) में 3 फीसदी की वृद्धि की गई है। अब राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 58% महंगाई भत्ता मिलेगा। यह निर्णय चुनावी समय में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
छात्रों की छात्रवृत्ति हुई दोगुनी
सरकार ने इस बैठक में छात्रों को भी बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री बालक-बालिका योजना के तहत दी जाने वाली छात्रवृत्ति की राशि को सीधे दोगुना कर दिया गया है।
कक्षा 1 से 4 तक के छात्रों को अब ₹1200 (पहले ₹600)
कक्षा 5 से 6 तक के छात्रों को अब ₹2400 (पहले ₹1200)
कक्षा 7 से 8 तक के छात्रों को अब ₹3600 (पहले ₹1800)
कक्षा 9 से 10 तक के छात्रों को अब ₹3600 (पहले ₹1800)
यह योजना 2013 से चल रही है, लेकिन छात्रवृत्ति में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहली बार की गई है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से गरीब और कमजोर तबके के बच्चों को पढ़ाई में मदद मिलेगी और आर्थिक बोझ कम होगा।
ANM कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी
कैबिनेट ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े प्रस्ताव पर भी मंजूरी दी। अब शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान के तहत काम कर रही एएनएम (ANM) कर्मियों को ₹11,500 की जगह ₹15,000 मानदेय मिलेगा। इतना ही नहीं, हर साल 5% वार्षिक मानदेय वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।
चुनाव से पहले बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश सरकार ने चुनावी मौसम को देखते हुए यह बड़े फैसले लिए हैं। छात्रवृत्ति की रकम दोगुनी करना, कर्मचारियों को महंगाई भत्ता बढ़ाकर देना और स्वास्थ्यकर्मियों के मानदेय में वृद्धि सीधे तौर पर जनता के बड़े वर्ग को प्रभावित करेगा। इससे सरकार को चुनाव में लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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