हिंदू धर्म में हर पर्व और तिथि का अपना विशेष महत्व है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद भगवान श्रीकृष्ण की छठी का पर्व बड़े ही श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व भगवान के जन्म के छठे दिन मनाया जाता है। इस दिन बाल गोपाल को स्नान कराकर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
इस साल कब मनाई जाएगी छठी?
साल 2025 में जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई गई थी। इसके बाद 6 दिन बाद, यानी 21 अगस्त 2025, गुरुवार को श्रीकृष्ण की छठी का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व आता है।
पूजा के शुभ मुहूर्त
श्रीकृष्ण छठी पर भक्त पूजा और अर्चना के लिए विशेष मुहूर्त देखते हैं। साल 2025 में शुभ समय इस प्रकार रहेगा:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:26 से 05:10 तक
अभिजित मुहूर्त: 11:58 से 12:50 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 से 03:26 तक
गोधूलि मुहूर्त: 06:54 से 07:16 तक
सायाह्न सन्ध्या: 06:54 से 08:00 तक
अमृत काल: 05:49 से 07:24 तक
निशिता मुहूर्त: 22 अगस्त की रात 12:02 से 12:46 तक
इनमें से किसी भी मुहूर्त में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
बाल कृष्ण छठी का महत्व
कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की अष्टमी को हुआ था। छठी का पर्व जन्म के 6 दिन बाद मनाकर भक्त उनकी बाल स्वरूप की पूजा करते हैं। इस दिन परिवार में सुख-समृद्धि और संतानों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
भोग का महत्व
श्रीकृष्ण छठी पर उन्हें विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन लड्डू गोपाल को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करने से भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
इस दिन लगाए जाने वाले भोग
माखन-मिश्री – यह श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय भोग है।
पंजीरी – पारंपरिक रूप से छठी पर यह भोग जरूर लगाया जाता है।
पंचामृत – दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना यह भोग पवित्र माना जाता है।
मखाने की खीर – स्वाद और सेहत दोनों के लिए उत्तम।
कढ़ी-चावल – घरों में छठी पर इसे विशेष रूप से पकाया जाता है।
इन व्यंजनों को अर्पित करने के बाद परिवारजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
श्रीकृष्ण की छठी का पर्व भक्तों के लिए बेहद खास होता है। यह न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि परिवार में आनंद, समृद्धि और सुख-शांति का संदेश भी देता है। इस साल 21 अगस्त 2025 को श्रद्धापूर्वक भगवान बाल गोपाल की पूजा कर, उन्हें माखन-मिश्री और पंजीरी का भोग अर्पित करके अपने जीवन में सुख-समृद्धि का स्वागत करें।
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