Azamgarh: गोलियों की गूंज से कांपा गांव, शराब, तनाव और गोलियां, एक साथ खत्म हुआ पूरा परिवार

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया। दरअसल जहानागंज थाना क्षेत्र के चकिया मुस्तफाबाद गांव में एक युवक ने नशे की हालत में अपनी मां, अपने दो मासूम बच्चों और खुद पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस खौफनाक वारदात में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्ची की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।

पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव में था युवक

वहीं घटना को अंजाम देने वाले युवक की पहचान नीरज पांडे के रूप में हुई है, जो कई दिनों से पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव में था। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह लंबे समय से घरेलू कलह से परेशान चल रहा था और शायद इसी वजह से उसने यह खौफनाक कदम उठाया।

मां और आरोपी नीरज की मौके पर ही मौत

मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को नीरज ने पहले भारी मात्रा में शराब पी। इसके बाद उसने अपनी प्राइवेट पिस्टल निकाली और घर में मौजूद अपनी मां और दोनों बच्चों पर गोलियां चला दीं। गोलीबारी की आवाजें सुनकर पड़ोसी घर की ओर दौड़े लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस हमले में नीरज की मां और खुद नीरज की मौके पर ही मौत हो गई। गोली लगने से घायल दोनों बच्चों को पड़ोसियों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। वहीं एक बच्ची की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है और उसे वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।

हृदयविदारक घटना के बाद गांव में पसरा सन्नाटा

स्थानीय लोगों के अनुसार, नीरज अक्सर तनाव में रहता था और बीते कुछ दिनों से काफी ज्यादा चुप और गुमसुम रहने लगा था। परिवार में चल रही खींचतान और दबाव ने उसे अंदर ही अंदर तोड़ दिया था। मंगलवार को शायद उसने ये तय कर लिया था कि अब और नहीं सहा जाएगा। इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अब भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक पढ़ा-लिखा युवक अपने ही परिवार के खिलाफ इतना बड़ा कदम कैसे उठा सकता है।

मामले की गहन जांच-पड़ताल में जुटी पुलिस

वहीं पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल में जुट गया है। इस बात की पड़ताल कर रहा है कि आखिर इस घटना के पीछे की असल वजह क्या थी। डीएसपी रैंक के अधिकारी ने बताया कि फोरेंसिक टीम सबूतों को इकट्ठा कर जांच में जुटी हुई है। साथ ही साथ आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। परिवार के बाकी सदस्यों और रिश्तेदारों से भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा सकें।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति हमारी उदासीनता का आइना भी है। अगर समय रहते किसी ने उसकी परेशानी समझी होती, बात की होती, तो शायद तीन मासूम जिंदगियां बच सकती थीं।

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The Hindi Post
Author: The Hindi Post