Rohit-Virat के रिटायरमेंट के बाद गौतम गंभीर की बड़ी डिमांड, पूरा कंट्रोल चाहिए…

नई दिल्ली: भारतीय टेस्ट क्रिकेट में एक युग का अंत हो चुका है। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों के संन्यास के बाद अब टीम इंडिया एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। इसी बीच भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने BCCI के सामने एक बड़ी मांग रख दी है—टीम के सभी फैसलों पर ‘पूरा कंट्रोल’। गंभीर का मानना है कि अगर भारतीय टेस्ट क्रिकेट को फिर से शिखर पर पहुंचाना है, तो पुराने ढर्रे को बदलना होगा।

‘सुपरस्टार कल्चर’ खत्म करना चाहते हैं गंभीर

गौतम गंभीर का फोकस भारतीय क्रिकेट में फैले ‘सुपरस्टार कल्चर’ को खत्म करने पर है। अब तक भारतीय टीमों में कप्तान का दबदबा रहा है और कोच अक्सर बैकसीट पर रहते थे, जैसा रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ के दौर में देखा गया। लेकिन गंभीर इस परंपरा को तोड़ना चाहते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए 10 नियमों वाला एक सेट तैयार किया है, जिसमें घरेलू क्रिकेट खेलना अनिवार्य और विदेश दौरे पर अनुशासित व्यवहार जैसी बातें शामिल हैं।

युवा खिलाड़ियों की टीम का सपना

गंभीर का अगला बड़ा लक्ष्य एक युवा और दीर्घकालिक टेस्ट टीम तैयार करना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर के साथ मिलकर रोहित और विराट को पहले ही इस योजना से अवगत करा दिया था। इसी के चलते दोनों दिग्गजों ने इंग्लैंड दौरे से पहले ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया। अब गंभीर की नजर युवा खिलाड़ियों पर है, जिन्हें वे नई सोच और अनुशासन के साथ तैयार करना चाहते हैं।

शुभमन गिल को कप्तान, लेकिन नियंत्रण गंभीर के पास

टीम इंडिया के नए टेस्ट कप्तान के तौर पर शुभमन गिल का नाम लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन जानकारों का मानना है कि असली ताकत कोच गौतम गंभीर के पास होगी। शुभमन गिल भले ही प्रतिभाशाली हैं, लेकिन अभी इतने सीनियर नहीं हैं कि गंभीर के फैसलों को चुनौती दे सकें। रिपोर्ट में कहा गया है कि गंभीर के फैसलों को चुनौती देने वाले एकमात्र खिलाड़ी जसप्रीत बुमराह हो सकते थे, लेकिन उनकी फिटनेस और कार्यभार को देखते हुए उन्हें पूर्णकालिक कप्तान बनाना संभव नहीं था।

BCCI से मांगी ‘पूरी आज़ादी’

गंभीर ने BCCI से साफ कहा है कि टीम के चयन से लेकर मैदान पर रणनीति तक—हर फैसले पर उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए। उनका मानना है कि न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के खिलाफ हाल की हारों को तभी रोका जा सकता है, जब कोच के पास टीम को ढालने की पूरी छूट हो।

अब गंभीर ही ‘बॉस’ होंगे

रोहित, विराट और अश्विन जैसे सीनियर खिलाड़ियों के टेस्ट से बाहर होने के बाद अब ड्रेसिंग रूम में गंभीर की ही सबसे मजबूत आवाज़ होगी। उन्होंने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि अब भारतीय टीम में अनुशासन, मेहनत और प्रदर्शन को ही महत्व मिलेगा—नाम या लोकप्रियता को नहीं। यह भारतीय क्रिकेट में कोच-सेंट्रिक युग की शुरुआत हो सकती है, जहां कप्तान से ज्यादा ताकत कोच के पास होगी।

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Author: The Hindi Post