Prime Minister मोदी का काशी से है अटूट रिश्ता, 11 साल में 50वीं बार आ रहे वाराणसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाराणसी से जो जुड़ाव है, वह महज एक संसदीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकास यात्रा का प्रतीक बन चुका है। 11 अप्रैल 2025 को वह काशी का 50वीं बार दौरा करेंगे। यह सफर 2013 से शुरू हुआ जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और खजुरी की विजय शंखनाद रैली से राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। तब से लेकर अब तक प्रधानमंत्री मोदी हर तीन-चार महीने में काशी आते रहे हैं, विकास की सौगातें लेकर और जनता से संवाद करने के बहाने खोजते हुए।

2014 में वाराणसी से सांसद बनने के बाद भी दिल्ली की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने काशी को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने खुद कहा था कि मां गंगा ने उन्हें बुलाया है और अब तो वह मानते हैं कि मां गंगा ने उन्हें गोद ले लिया है। यही कारण है कि 16 मई 2014 को चुनाव नतीजों के तुरंत बाद वे काशी पहुंचे और मां गंगा की आरती कर स्वच्छता का संकल्प लिया। अस्सीघाट पर खुद फावड़ा चलाकर स्वच्छ भारत अभियान की नींव रखी।

काशी के विकास में उनका विशेष ध्यान रहा है। 2018 में रिंग रोड और बाबतपुर फोरलेन से लेकर 2021 में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण तक, हर यात्रा में उन्होंने सैकड़ों करोड़ की परियोजनाओं की सौगात दी। 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मोदी काशी तीन बार आ चुके हैं। 18 जून को किसानों के सम्मेलन में सम्मान निधि वितरित की, 20 अक्टूबर को पूर्वांचल के लिए आई हॉस्पिटल समर्पित किया, तो 13 मई को रोड शो कर नामांकन दाखिल किया।

उन्होंने कई बार शहर में रात्रि विश्राम किया और रात में पैदल निकलकर विकास कार्यों का निरीक्षण भी किया। गोदौलिया, लंका, कैंट स्टेशन जैसे स्थानों पर आम लोगों से सीधे संवाद करते दिखे। उनकी ये यात्राएं केवल औपचारिक नहीं होतीं, बल्कि वे यहां के हर पहलू से जुड़ाव महसूस करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी जब काशी नहीं आ पाते, तब भी वर्चुअली जुड़े रहते हैं। कोरोना काल में उन्होंने वीडियो संदेशों और वर्चुअल बैठकों के जरिए काशीवासियों से संवाद किया। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ वर्चुअल टिफिन बैठक की और भोजपुरी में वीडियो संदेश जारी किया।

काशी का नाम मोदी देश-विदेश में हर मंच पर गर्व से लेते हैं। यहां के कलाकार, खिलाड़ी, खिलौने, संगीत और संस्कृति की चर्चा वे मन की बात से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक करते हैं। उनकी यह 50वीं यात्रा न सिर्फ आंकड़ों में बड़ी है, बल्कि यह बताती है कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए काशी सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि एक भावनात्मक धरोहर है।

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Author: The Hindi Post