विराट कोहली—भारतीय क्रिकेट का वो नाम जिसने पिछले 16 सालों में अपनी आक्रामकता, हुनर, और जुनून से फैंस के दिलों में जगह बनाई। उनके करियर की शुरुआत से ही आक्रामकता उनकी पहचान रही है। चाहे अंडर-19 वर्ल्ड कप की जीत हो, शुरुआती अंतरराष्ट्रीय करियर में बल्ले से धमाल मचाना हो, या कप्तान के रूप में टीम इंडिया को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना, कोहली ने हर भूमिका में खुद को साबित किया। लेकिन पिछले कुछ सालों में उनके प्रदर्शन में गिरावट और तेवरों में बदलाव ने कई सवाल खड़े किए हैं।
आक्रामकता सफलता की कुंजी
2008 में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाले युवा कप्तान कोहली की तस्वीरें अखबारों के पहले पन्नों पर थीं। तभी से उन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाने लगा था। उनका आक्रामक रवैया, बल्ले से कमाल और मैदान पर दबदबा उनकी पहचान बन गए। उन्होंने कई बार फील्ड पर अपने गुस्से और जुझारूपन का प्रदर्शन किया, लेकिन साथ ही बल्ले से भी बेहतरीन प्रदर्शन कर यह साबित किया कि वे भारतीय क्रिकेट की रीढ़ हैं।
हाल के वर्षों में कोहली का प्रदर्शन लगातार गिरावट पर है। 2019 के बाद से उनकी बल्लेबाजी में स्थिरता नहीं रही। उनका स्ट्राइक रेट, शतक और अर्धशतक की संख्या गिरने लगी। इस दौरान कई विवाद भी हुए, लेकिन इनसे निपटने में उनकी संयमितता ने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि असफलता ने उन्हें बदल दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में टूटा घमंड
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर कोहली का आक्रामक रूप फिर से दिखा। मेलबर्न टेस्ट में उनका युवा खिलाड़ी के साथ कंधा मारना, ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों से भिड़ना और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कड़े शब्दों का इस्तेमाल उनके पुराने तेवरों की झलक थी। हालांकि, इस बार उनके बल्ले से रन नहीं निकले। 6 पारियों में केवल 162 रन बनाना उनके प्रशंसकों के लिए निराशाजनक रहा।
आक्रामकता से जीता नहीं, लड़ा जा सकता है
कोहली के पुराने प्रशंसकों का मानना है कि जब कोहली रन बना रहे थे, तब उनकी आक्रामकता को लोग उनके प्रदर्शन से जोड़कर स्वीकार करते थे। लेकिन अब वह सिर्फ “शोर” करते नजर आ रहे हैं। मैदान पर उनका गुस्सा, विवाद और प्रदर्शन में गिरावट यह दर्शाता है कि कोहली के पास अब वह आत्मविश्वास नहीं रहा, जो पहले उनके हर शॉट में झलकता था।
भविष्य के लिए सबक
आज विराट कोहली के पास समय कम है। उनका अनुभव, काबिलियत और जुनून अब भी भारतीय क्रिकेट के लिए अमूल्य है। लेकिन उन्हें समझना होगा कि केवल आक्रामकता से खेल में वापसी नहीं की जा सकती। उन्हें अपने बल्ले से जवाब देना होगा, जैसा वे पहले करते थे वैसे ही।;