दुनिया में मां बनने का एहसास सबसे खूबसूरत होता है. इस एहसास के लिए 9 महीने ना जाने कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. लेकिन जब गर्भ में 2 या दो से ज्यादा बच्चे पल रहे हों, तो केयर थोड़ी एक्स्ट्रा करनी पड़ जाती है. लेकिन क्या कभी आपने इसके बारे में सोचा है कि ट्विंस बच्चों का आखिर जन्म कैसे होता है.
ट्विंस बच्चे
आपने अपने आस पास या खुद ट्विंस या उससे ज्यादा बच्चे पैदा होने के बारे में सुना होगा. लेकिन क्या कभी सोचा है कि ट्विंस बच्चे कैसे होते हैं?
क्या कहती है साइंस
साइंस की मानें तो ट्विंस बच्चे भी दो तरह के होते हैं. पहले मोनोजाइगोटिक और दूसरे डाइजाइगोटिक. लेकिन मोनोजाइगोटिक को आइडली ट्विंस कहा जाता है.
मोनोजाइगोटिक
मोनोजाइगोटिक में ट्विंस बच्चे एक ही अंडे से विकसित होते हैं. जो समय के साथ साथ बाद में अलग लग भ्रूण में डिवाइड हो जाते हैं.
एक DNA
मोनोजाइगोटिक में ट्विंस में एक ही DNA होता है. जो एक ही जेंडर के होते हैं.
डाइजाइगोटिक
डाइजाइगोटिक में ट्विंस बच्चे दो अलग अलग अंडों से विकसित होते हैं. इनका फर्टिलाइजेशन भी दो अलग अलग स्पर्म से होता है.
डाइजाइगोटिक DNA
इसमें ट्विंस बच्चों का DNA अलग अलग होता है. और संभव है कि दोनों के जेंडर भी अलग अलग हो सकते हैं.
ये भी कारण
इसके अलावा ट्विंस बच्चों के होने के चांसेज आनुवांशिकी, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट, IVF समेत मां की उम्र पर भी निर्भर करता है.