रौशनी का त्योहार दिवाली भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक माना जाता है. दीपावली के त्योहार पर लोग अपने मन के सभी गिले-शिकवे मिटा कर एक दूसरे को बधाई देते हैं. हिंदू धर्म में दीपावली के त्योहार का बहुत महत्व है. वहीं दीपावली के दिन पूजा का विधि-विधान और मुहूर्त क्या है? ये तो सभी जानना चाहते हैं. आइए हम आपको बताते हैं कि दीवाली का त्योहार इस साल कब है?
दिवाली कब है?
हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार दिवाली का त्योहार कार्तिक अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. भारत में विशेषकर उत्तरी भारत में दिवाली का पर्व पांच दिनों का होता है. दीपावली का त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के 13वें चंद्र दिवस धनतेरस के मौके पर शुरू होकर भाई दूज के दिन खत्म होता है. इस बार की दिवाली उत्तर भारत और दक्षिण भारत में एक ही दिन पड़ रही है. इस साल दिवाली 31 अक्टूबर और 1 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी.
कार्तिक अमावस्या तिथि का समय
31 अक्तूबर, दोपहर 3 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 1 नवंबर शाम को 6 बजकर 17 मिनट तक का है.
प्रदोष पूजा का समय
1 नवंबर, शाम 5 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर रात के 8 बजकर 19 मिनट तक प्रदोष पूजा का समय है. 2024 की दिवाली 29 अक्टूबर 2024 मगंलवार के दिन धनतेरस के साथ शुरू होगी और 3 नवंबर 2024, रविवार को भाईदूज के दिन खत्म होगी. दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा और आराधना की जाती है. मां लक्ष्मी वैभव की देवी कहा जाता है.
2024 में दिवाली की तारीखें क्या है?
दिवाली के दिन लोग माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा आराधना विधि-विधान के साथ करते हैं. इस साल दिवाली 1 नवंबर 2024, शुक्रवार के दिन पड़ रही है. वहीं कुछ लोग इसे 31 अक्टूबर को भी मनाएंगे.
दिवाली पूजा की पूजन सामग्री
दिवाली की पूजा के लिए पूजा सामग्री में सबसे पहले मां लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा, रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), पान, सुपारी, नारियल, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी के दीऐ, रूई, कलावा, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूं, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, पंचामृत, दूध, मेवे, बताशे, जनेऊ, श्र्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, बैठने का आसन, हवन कुंड, हवन सामग्री, आम के पत्ते और प्रसाद रखना जरुरी है.
दिवाली पूजन विधि
स्वास्तिक चिन्ह बनाएं
सबसे पहले ईशान कोण को या उत्तर दिशा में साफ सफाई करके स्वास्तिक चिन्ह बनाएं. उसके ऊपर अक्षत को डालें.
लकड़ी का आसन
इसके बाद लकड़ी का आसन लाल कपड़े के साथ बिछाएं. आसन पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति को विराजमान करें.
पंचदेव स्थापना
पूजा शुरू करने से पहले पंचदेव में सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णुजी की मूर्ति को स्थापित करें. इसी के साथ गंगाजल के छींटें डालकर इसे पवित्र करें.
गणेश जी के मंत्र
सर्वप्रथम गणेश जी के मंत्रों से पूजा को शुरू करें. भगवान गणेश जी की पूजा को “गजाननं भूतगणादि सेवितंकपित्थजम्बूफलसार भक्षितम्। उमासुतं शोकविनाशकारणंनमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥ मंत्र के साथ करें.
लाल सिंदूर का तिलक
माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने के बाद उन्हें लाल सिंदूर का तिलक लगाएं.
मिठाई का भोग
पूजा के बाद मां लक्ष्मी और गणेश जी की आरती करें और उन्हें मिठाइयों का भोग लगाएं.
हर कोने में दीपक
आरती और प्रसाद का वितरण सभी लोगों में करें और घर के प्रत्येक कोने में दीऐ जलाएं.