अक्सर राजनीति के क्षेत्र में कई ऐसे मामले सामने आ जाते हैं. जिन मामलों से ज्यादातर लोग नावाकिफ होते हैं. वहीं फिलहाल राजनीति में हेट स्पीच के दो मामले काफी चर्चा में हैं. पहला मामला राहुल गांधी से जुड़ा हुआ है तो वहीं दूसरा मामला ज्ञानवापी मामले को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को लेकर है. जहां राहुल गांधी के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर राहुल गांधी के खिलाफ की गई हेट स्पीच पर चिंता जाहिर की है. तो वहीं अखिलेश और ओवैसी के मामले में इन दोनों नेताओं पर अमर्यादित टिप्पणी करके हिन्दू समाज के प्रति घृणा फैलाने का आरोप है. वहीं इस मामले को लेकर दाखिल याचिका को वाराणसी की कोर्ट ने निरस्त कर दिया है. जिसके बाद अब ये सवाल उठने लगा है कि किस-किस तरह के मामले हेट स्पीच में आते हैं, अगर ऐसे मामलों में किसी को दोषी पाया जाता है तो उसे कितने सालों की जेल होगी और कितना जुर्माना देना पड़ सकता है?
हेट स्पीच में कौन-कौन से मामले आते हैं?
हेट स्पीच को लेकर नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता में कई बातें कही गई हैं. भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के अनुसार किसी धर्म, जाति, निवास स्थान या भाषा के आधार पर नफरत फैलाना हेट स्पीच में आता है. इसके अलावा किसी समूह के खिलाफ डर फैलाना या फिर हिंसा को भड़काना भी हेट स्पीच माना जाता है. इसके अलावा किसी समूह के खिलाफ दुश्मनी, द्वेष या घृणा की भावना को पैदा करने के मामले में इसी के तहत आते हैं.
हेट स्पीच मामले में कितने साल की सजा का प्रावधान?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के अनुसार अगर कोई शख्स समुदायों या किसी के प्रति नफरत फैलाता है तो उसे 3 साल की में जेल भेजा जा सकता है या फिर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है या फिर दोनों लागू हो सकते हैं. इसके अलावा अगर कोई ऐसी हरकत पूजा स्थल या धार्मिक कार्यक्रमों में जुटी भीड़ के दौरान करता है. तो उसे 3 से 5 साल की जेल हो सकती है.नए कानून में धारा 353 में भी समुदायों के बीच घृणा फैलाने पर सजा का प्रावधान या है. अगर कोई झूठा बयान, रिपोर्ट या अफवाह जारी करता है जिससे किसी एक समुदाय को दूसरे से खिलाफ अपराध के लिए उकसाया जा सकता है. तो ऐसे मामले में भी सजा का प्रावधान है. ऐसी स्थिति में दोषी को 3 साल की जेल या जुर्माना या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है.
राहुल गांधी पर क्या टिप्पणी की गई थी?
दरअसल 11 सितंबर को राहुल गांधी के घर के बाहर भाजपा ने प्रदर्शन किया. वहीं आरोप लगा कि भाजपा नेता तरविंदर सिंह मारवाह ने राहुल गांधी को जान से मारने की धमकी दी है. 15 सितंबर को भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने राहुल गांधी को आतंकवादी कह दिया. बिट्टू ने कहा कि राहुल गांधी को देश से प्यार नहीं है. वो हिन्दुस्तानी नहीं हैं. पहले तो राहुल ने मुसलमानों का इस्तेमाल करने की कोशिश की. अब सिखों को बांटने की कोशिश में जुटे हुए हैं. बता दें कि इस मामले को लेकर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों में भाजपा नेताओं के खिलाफ बुधवार को प्रदर्शन किया. इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि राहुल गांधी विदेश जाकर भारत की प्रतिष्ठा को गिराते हैं. इसलिए उनका पासपोर्ट रद्द होना चाहिए. भाजपा सांसद अनिल बोंडे ने भी राहुल पर बयान देते हुए कहा कि राहुल गांधी की जीभ काट लेनी चाहिए.