आजकल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के हाथ में एक चीज दिखना आम बात हो गई है. ये चीज कुछ और नहीं बल्कि मोबाइल फोन है. जिसकी बुरा असर सबसे ज्यादा मासूम बच्चों पर पड़ता है. माता-पिता द्वारा कुछ समय के लिए कार्टून देखने या फिर बच्चों को कुछ समय के लिए व्यस्त रखने के लिए दिया जाने वाला ये उपकरण धीरे-धीरे लत बन जाता है. एक समय आने पर अभिभावकों को भी समझ नहीं आता कि वो इस लत से बच्चों का पीछा कैसे छुड़ाएं. मगर कुछ टीचर्स ने बच्चों को इस लत से निजात दिलाने का उपाय खोज निकाला है. जी हां बदायूं के एक स्कूल के टीचर्स ने बच्चों के भविष्य के लिए एक अनूठी पहल की है.
टीचर्स की हालत देख कर बच्चों ने की मोबाइल फोन से तौबा
दरअसल स्कूल के टीचर्स ने मिलकर बच्चों के सामने एक ऐसा नाटक पेश किया. जिसे देखने के बाद बच्चे मोबाइल फोन से डरने लगे. वायरल वीडियो में एक टीचर आंखों पर पट्टी बांधकर बच्चों के सामने आती है. इसके बाद घायल टीचर के आसपास खड़ी टीचर्स उनसे पूछती है कि मैम आपको क्या हुआ. तब टीचर रो-रोकर बच्चों के सामने बताती हैं कि कल मैंने कई बार मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया. इस वजह से मेरी आंखों से खून आने लगा है. टीचर की ये बात सुनकर बच्चे सहम जाते हैं. इसके बाद कुछ टीचर्स बच्चों को मोबाइल फोन देने का प्रयास करती हैं. मगर बच्चे मोबाइल फोन लेने से मना कर देते हैं. यहां तक कि कुछ बच्चे तो टीचर की ये हालत देख कर रोने तक लग जाते हैं. इसके बाद टीचर जाते हुए बच्चों से कहती हैं कि आप लोग ज्यादा देर तक मोबाइल का इस्तेमाल मत करना, वरना आपके साथ भी ऐसा हो सकता है. वहीं अब ये वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो रहा है. ये वीडियो सोशल मीडिया एक्स के हैंडल @VikashMohta_IND पर शेयर किया गया है.
यूजर्स ने की टीचर्स की पहल की सराहना
टीचर का बच्चों से मोबाइल फोन की लत छुड़ाने का ये वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस कदर वायरल हो रहा है, कि इसे 24 घंटों से भी कम समय में 7 लाख से अधिक व्यूज मिल चुके हैं. इस पोस्ट पर सैंकड़ों यूजर्स ने कमेंट किया है. ज्यादातर लोगों का मानना है कि वाकई शिक्षकों का प्रयास सराहनीय है लेकिन यह सिर्फ छोटे बच्चों पर ही असर कर सकता है. वहीं कई यूजर्स का कहना है कि बच्चों को मोबाइल फोन के नुकसान के बारे में भी बताना चाहिए. एक यूजर ने लिखा है- बच्चों के लिए ऐसे क्रिएटिव आइडियाज बहुत जरूरी है. साथ ही उन्हें इसके दुष्प्रभाव के बारे में भी बताना चाहिए. दूसरे यूजर ने लिखा है- बड़े बच्चों को भी जागरूक करना चाहिए.