शिमला के संजौली में मस्जिद को लेकर विवाद गर्माया हुआ है. इस मस्जिद को दो समुदाय के युवकों में लड़ाई के बाद से गिराने की मांग की जा रही है. इस मांग को लेकर हिंदू संगठन अड़े हुए हैं. मस्जिद के अवैध रूप से बनाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है. हालांकि यह मस्जिद 1947 से पहले की है. जो कि वक्फ बोर्ड की मस्जिद है. इसमें दो मंजिल बिना अनुमति के बनाई गई है. वहीं इस पूरे मामले को लेकर संजौली में काफी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है.
मस्जिद तोड़ने को लेकर हिन्दू संगठन अड़े
संजौली में हिन्दू संगठन मस्जिद तोड़ने को लेकर अड़े हुए हैं. वहीं मस्जिद को तोड़ने की कांग्रेस के मंत्री ने भी मांग उठाई है. चार दिन पहले हिंदू संगठनों ने रैली निकाली, जिसमें शिमला नगर निगम के कांग्रेस के तीन पार्षद भी शामिल हुए और मस्जिद के बाहर धरना प्रदर्शन किया और मस्जिद में हुए निर्माण को गिराने की मांग उठाई. तनावपूर्ण माहौल के चलते शहर में यूपी सहारनपुर के लोगो की दुकानें भी बंद करवा दी गईं हैं. वहीं यह मामला विधानसभा में भी उठा. कांग्रेस के ही मंत्री ने इस मस्जिद को तोड़ने की मांग उठाई. मस्जिद को तोड़ने की मांग कांग्रेस सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने उठाई है और बाहर से आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों पर नजर रखने की भी मांग की गई है. इस दौरान उन्होंने यहां तक कह दिया कि कोई बांग्लादेशी रोहंगिया, पाकिस्तान या कोई आतंकवादी भी बे रोक टोक आ जाएगा.
धार्मिक स्थल का नहीं बल्कि वैध और अवैध निर्माण का है मुद्दा
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अनुसार ये किसी धार्मिक स्थल का मामला नहीं है. बल्कि वैध और अवैध निर्माण का मामला है. 2010 में इसका निर्माण शुरू हुआ. यहां पर पहले दुकान हुआ करती थी. कई बार इस मामले में नोटिस दिए गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. जिसके चलते यहां पर जो निर्माण हुआ वह 6750 स्क्वायर फुट तक पहुंच गया. यह जमीन हिमाचल प्रदेश सरकार की है. सरकारी जमीन पर कोई भी इस तरह निर्माण नहीं कर सकता है. सवाल यहां ये है कि इसका नक्शा किस तरह पास हो गया. इस मामले में नगर निगम शिमला की गलती है. आज सदन में भी यह मुद्दा उठा है. मुख्यमंत्री से विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने मुलाकात की हैं. मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है इसपर कार्रवाई होगी. मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि तहत बाजारी नियमों को भी सख्ती से लागू किया जाए.
दो गुटों के आपसी झगड़े से शुरू हुआ विवाद
वहीं शिमला शहर के कांग्रेस विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि यह विवाद दो गुटों के आपसी झगड़े के कारण पैदा हुआ है. यह झगड़ा मल्याणा क्षेत्र में हुआ है. इस मुद्दे को बढ़ाया जा रहा है. इस झगड़े में पुलिस को FIR दर्ज करने के पहले निर्देश दे दिए गए थे. इस मामले को हिन्दू व मुस्लिम समुदाय का रूप दिया जा रहा है. जो कि बिल्कुल गलत है. शिमला एक शांतिप्रिय स्थान है और इसकी शांति भंग ना करें. हरीश जनारथा ने कहा जो अवैध मस्जिद की बात कर रहे हैं. ये मस्जिद 1950 से पहले की है. यहां पर जो अवैध निर्माण हुआ है, उसका मामला चल रहा है. जिसकी सुनवाई शनिवार को होनी है. वक्फ बोर्ड इस केस को लड़ रहा है. यह मामला 2009 से चल रहा है. इसके बाद कितनी सरकारें आईं. इस मामले को लेकर किसी धर्म समुदाय पर बोलना ठीक नहीं है. यह मामला कोर्ट में है और इस पर निर्णय भी कोर्ट ही देगा.