कहते हैं मदरसों में बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जाती है. मगर भारत में बने ये मदरसे शिक्षा देने के लिए नहीं बल्कि बच्चों में सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ाने के लिए खोले गए हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि प्रयागराज के अतरसुइया इलाके में जामिया हबीबिया नाम के एक ऐसा मदरसा मिला है जहां पर नकली भारतीय नोटों की परफेक्ट कॉपी छापी जाती थी. इतना ही नहीं मदरसे में नफरती नागरिक भी तैयार किए जा रहे थे.
मदरसे के बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहा था मौलाना
इस मदरसे के मौलाना मोहम्मद तफसीरुल बच्चों को बताता था कि RSS के लोगों पर अटैक कैसे करना है. मदरसे के बच्चों का ये मौलाना ब्रेनवॉश कर रहा था. मदरसे स नकली नोटों का जखीरा और नोट छापने की मशीनें मिलने पर मदरसे की देश विरोधी गतिविधियों का पता चला. सुरक्षा एजेंसियों ने जांच आगे बढ़ाई तो मामला और ज्यादा गंभीर हो गया. मदरसे से जांच एजेंसियों को कई अहम दस्तावेज़ हाथ लगे हैं. मदरसे से जांच एजेंसियों को मौलाना मोहम्मद तफसीरुल के कमरे से उर्दू में लिखे कुछ भड़काऊ साहित्य मिले हैं. उर्दू भाषा की एक किताब में RSS को देश का सबसे बड़ा आतंकी संगठन करार दिया गया है. इन साहित्यों में देश में होने वाली आतंकी घटनाओं का भी जिक्र किया गया है. मौलाना के कमरे से स्पीड पोस्ट की कुछ पर्चियां भी जांच एजेंसियों को मिली हैं. जिनके आधार पर पते वैरिफाई किए जा रहे हैं. पूछताछ भी लगातार जारी है.
एसएम मुशर्रफ ने RSS पर लिखे भड़काऊ साहित्य
मदरसे से मिली RSS पर लिखे गए भड़काऊ साहित्य के लेखक हैं एसएम मुशर्रफ. जो कि महाराष्ट्र पुलिस में पूर्व पुलिस महानिरीक्षक हैं. एसएम मुशर्ऱफ की किताब आरएसएस- देश का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन में RSS को एक सांप्रदायिक संगठन बताया है. मुशर्ऱफ देश में होने वाले आतंकी हमलों के पीछे कट्टर इस्लामिक आतंकी संगठनों को नहीं, बल्कि RSS को जिम्मेदार बताते हैं. हिंदू समाज में फूट डालने के लिए एस एम मुशर्रफ ने ये भ्रम फैलाया कि देश में होने वाले सांप्रदायिक दंगे ब्राह्मणों की साजिश हैं. इसी तरह से उनकी एक किताब है Who killed karkare- The real face of terrorism in india… इस किताब में एस एम मुशर्रफ ने मुंबई के 26/11 हमले को ‘हिंदू अटैक’ बताया था. एस एम मुशर्रफ ने इस हमले के पीछे हिंदुओं की साजिश बताया था. इसी वजह से पाकिस्तानी अखबारों ने उनकी काफी तारीफ की थी, क्योंकि मुंबई अटैक को पाकिस्तान की साजिश नहीं माना था.