भारत में कब बना था इस्कॉन टेंपल, अब तक दुनिया में कहां-कहां है मंदिर, एक क्लिक में जानें सब

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे भारत में बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. लोग इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत करके रात के समय आनंद के साथ भगवान का जन्म करते हैं. साल 2024 में जन्माष्टमी का त्योहार सोमवार 26 अगस्त 2024 को मनाया जाने वाला है. दुनिया भर में भगवान श्रीकृष्ण के बहुत से मंदिर स्थापित हैं. जिनमें में से एक इस्कॉन मंदिर भी है. भारत के इन इस्कॉन मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और भगवद् गीता के संदेशों को दुनिया भर में पहुंचाने का काम होता हैं. इस्कॉन का पूरा नाम इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस है. इस्कॉन मंदिर के दुनिया भर में 1 हजार से ज्यादा केंद्र बने हैं.

भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की इस्कॉन मंदिर की स्थापना

हरे कृष्ण मूवमेंट के नाम से भी इस्कॉन को जाना जाता है. इस्कॉन सोसाइटी की स्थापना भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने सन् 1966 में इसकी स्थापना की थी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का जन्म कोलकाता में हुआ था. वह भगवान श्री कृष्ण के बहुत बड़े भक्त माने जाते थे. स्वामी प्रभुपाद हमेशा ही कृष्ण भक्ति में लीन रहते थे. इसी कारण उन्होंने गौड़ीय संप्रदाय के अभिलेख लिखने का काम शुरू किया था. इसके बाद प्रभुपाद ने हरे कृष्णा मूवमेंट शुरू करने का मन बनाया. उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी में इस्कॉन मंदिर की स्थापना की थी.

1975 में हुआ भारत के पहले इस्कॉन मंदिर का निर्माण

इस्कॉन मंदिर के भारत में लगभग 400 केंद्र हैं. श्रीकृष्ण की जन्म भूमि वृंदावन में भारत में पहले इस्कॉन मंदिर की स्थापना हुई थी. इसे लोग कृष्ण-बलराम मंदिर के नाम से भी जानते हैं. कृष्ण-बलराम मंदिर का निर्माण 1975 में किया गया था. यहां पर कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाने का तरीका अन्य श्रीकृष्ण मंदिरों से काफी अलग है.

 

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Author: The Hindi Post