कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को लेकर कई खुलासे हो रहे हैं. अब इस मामले में अस्पताल के एक पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली ने कई दावे पेश किए हैं. पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली की मानें तो संदीप घोष शव बेचने समेत कई अवैध गतिविधियों में शामिल थे. वहीं एजेंसी ने संदीप से कई बार मैराथन पूछताछ की है. सीबीआई ने संदीप घोष से पूछा था कि उन्होंने पीड़िता के माता-पिता को शव सौंपने से पहले 3 घंटे तक इंतजार क्यों करवाया? साथ ही ये भी पूछा कि उन्होंने पीड़िता के घर फोन कर क्यों कहा कि पीड़िता ने आत्महत्या की है. बता दें कि आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिसिपल संदीप घोष ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप के बाद आरोपों के घेरे में हैं.
घोष का स्टूडेंट रैकेट करता है डेड बॉडी सेल- अख्तर अली
कोलकाता स्थित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली का दावा है कि संदीप घोष एक रैकेट चलाते थे. पैसे को लेकर बच्चों को फेल कर देते थे. अस्पताल में यूज्ड सीरिंग का प्रयोग करवाते थे. कुछ स्टूडेट्स का रैकेट बना रखा था. वे डेड बॉडी सेल किया करते थे. पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली का दावा है कि संदीप घोष को उन्होंने संजय राय के साथ देखा है. मुझे कल बुलाया गया था. एसआईटी के सामने मैंने सारी बात रखी है. एंटी क्रप्शन ब्यूरो को अख्तर अली से 13 जुलाई 2023 को शिकायत मिली थी और डीआईजी एसीबी ने इसे 20 जुलाई 2023 को प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भेज दिया. शक्ति और अधिकार होने के बावजूद एसीबी ने शिकायत पर कोई जांच शुरू नहीं की और कोई मामला दर्ज नहीं किया. उन्होंने कहा कि मेरी कम्प्लेंट पर एक्ट पहले किया गया होता तो आज यह नौबत नहीं आती. उन्होंने आरोप लगाया कि संदीप घोष के तार बांग्लादेश से भी जुड़ा हुआ है. वह बांग्लादेश के साथ तस्करी में शामिल था और लावारिस शवों का कारोबार भी करता था.
संदीप घोष पर लगे ये गंभीर आरोप
अख्तर अली ने दावा किया कि उन्होंने राज्य सतर्कता आयोग को संदीप घोष की कथित नापाक गतिविधियों के बारे में सूचित किया था. उन्होंने कहा कि वे जांच पैनल का हिस्सा थे, जिसने उन्हें दोषी पाया. हालांकि जिस दिन उन्होंने राज्य स्वास्थ्य विभाग को जांच रिपोर्ट सौंपी. उसी दिन उनका तबादला कर दिया गया. उन्होंने कहा कि संदीप ने छात्रों को परीक्षा में पास कराने के लिए रिश्वत मांगी. अस्पताल से निकलने वाले टेंडर पर वह 20 फीसदी कमीशन लेता था. अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए चार सदस्यीय एसआईटी गठित किए जाने के बाद संदीप घोष के खिलाफ जांच शुरू हुई.