देश में अक्सर कोई ना कोई घोटाला सामने आ जाता है. अगर इन घोटालों की जद में कोई बड़ा कारोबारी आता है तो कोई मुश्किल नहीं होती. मगर यदि सूबे का सीएम का इसमें हाथ होतो है. तो उसकी गिरफ्तारी राज्यपाल की अनुमति के बाद ही गिरफ्तारी हो सकती है. देखा जाए तो जब-जब राज्यपाल की मंजूरी मिली है. तब-तब मुख्यमंत्रियों ने जेल की हवा खाई है. फिलहाल कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया पर खतरे की तलवार लटक रही है. जिसका कारण है कि कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुडा स्कैम में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री की पत्नी बीएम पार्वती मुडा स्कैम में मुख्य आरोपी हैं. उन पर गलत तरीके से मैसूर में जमीन लेने का आरोप है.
तांसी जमीन घोटाला जयललिता को ले डूबा
तमिलनाडु में 1995 में जयललिता की सरकार थी. उसी वक्त उन पर तांसी जमीन घोटाले का आरोप लगा था. इस आरोप के बाद जयललिता बैकफुट पर आ गईं थीं. एक तरफ उनके खिलाफ विपक्ष सड़क पर थी, तो दूसरी तरफ वरिष्ठ वकील सुब्रमण्यम स्वामी उन्हें कानूनी तौर पर घेर रहे थे. वरिष्ठ वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने इस केस की जांच की मंजूरी के लिए तमिलनाडु के तत्कालीन राज्यपाल ए चन्ना रेड्डी को पत्र लिखा. जिसके बाद राज्यपाल ने तांसी जमीन घोटाले की जांच की मंजूरी दे दी. जयललिता इस केस में गिरफ्तार तो नहीं हुईं, लेकिन 1996 में उनकी सरकार चली गई. सरकार जाते ही उन पर आय से अधिक संपत्ति का केस शुरू हो गया. जयललिता को इस केस में जेल जाना पड़ा.
चारा घोटाले के मामले में लालू गए थे जेल
साल 1997 में संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाला का आरोप लगा था. जिस पर काफी बवाल हुआ था. लालू के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चेबंदी शुरू की. मामला हाईकोर्ट पहुंचा और सीबीआई जांच की मांग शुरू हुई. बवाल बढ़ता देख राज्यपाल एआर किदवई ने लालू यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की परमिशन दे दी. सीबीआई इसके बाद इस मामले की जांच शुरू की. जांच के कुछ ही दिन बीतने के बाद सीबीआई ने इस मामले में मुख्यमंत्री लालू यादव को गिरफ्तार कर लिया. लालू ने गिरफ्तार होने के बाद अपनी जगह पर पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी. चारा घोटाला मामले में निचली अदालत से लालू यादव दोषी करार दिए जा चुके हैं. वर्तमान में लालू यादव इस मामले में स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर हैं.
खनन घोटाले में मधु कोड़ा की कुर्सी गई
झारखंड में 2006 में निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे. 2 साल तक कोड़ा की सरकार में सबकुछ ठीक-ठाक से चलता रहा लेकिन इसी बीच कोड़ा पर खनन घोटाले का आरोप लगा. कोयला खाद्यान्न के आवंटन में कोड़ा की टीम द्वारा करीब 400 करोड़ रुपए कमाने का आरोप लगा था. तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और शुरुआत में मामले में लीपापोती की कोशिश की गई लेकिन धीरे-धीरे कोड़ा का मुद्दा झारखंड में तूल पकड़ने लगा. राजनीतिक नुकसान को देखते हुए शिबू सोरेन ने कोड़ा सरकार से समर्थन वापस ले लिया. कोड़ा के खिलाफ तत्कालीन राज्यपाल सीब्ते रिजवी ने सीबीआई को जांच के लिए पत्र लिखा. सीबीआई जब इसकी पड़ताल शुरू की तो उसे मनी लॉन्ड्रिंग के भी सबूत मिले. 2009 में कोड़ा मामले में सीबीआई और ईडी दोनों ने मिलकर जांच की औऱ सीबीआई ने कोड़ा को गिरफ्तार कर लिया. कोड़ा 2012 तक जेल में बंद रहे. 2017 में उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया गया. बहरहाल वर्तमान में कोड़ा की पत्नी राजनीति में है.
2011 में बीएस येदियुरप्पा पर लगे थे भ्रष्टाचार के आरोप
2011 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर संतोष हेगड़े की नेतृत्व वाली लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. येदियुरप्पा पर जमीन को गलत तरीके से आवंटित करने का मामला सामने आया था. उस वक्त कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज थे. बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ भारद्वाज ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी. राज्यपाल हंसराज के इस फैसले की काफी आलोचना की गई. इसके बाद लोकायुक्त कोर्ट ने येदियुरप्पा के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट निकाले. आखिरकार अक्टूबर 2011 में येदियुरप्पा को गिरफ्तारी देनी पड़ी. जिसके बाद येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी. इस मामले में येदियुरप्पा 23 दिनों तक जेल में रहे. बाद में सीबीआई ने इस मामले को टेकओवर कर लिया और येदियुरप्पा के खिलाफ जांच शुरू की.
LG की मंजूरी से केजरीवाल रडार पर आए
2022 में दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केजरीवाल सरकार के शराब पॉलिसी की जांच सीबीआई को सौंप दी. इस केस की शुरुआत में सीबीआई ने पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से पूछताछ की. अक्टूबर 2022 में सीबीआई ने ईडी के साथ मिलकर सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया. सिसोदिया के खिलाफ इस मामले की जांच चल ही रही थी कि ईडी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आरोपी बना दिया. मार्च 2024 में ईडी ने केजरीवाल को भी लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया. इस केस में वर्तमान में सिसोदिया जमानत पर बाहर हैं, जबकि केजरीवाल अभी भी जेल में बंद हैं.
राज्यपाल की मंजूरी के बाद सिद्धारमैया पर भी कसेगा शिकंजा!
राज्यपाल की तरफ से जारी केस की मंजूरी पत्र में कहा गया है कि राज्यपाल प्रथम दृष्टया संतुष्ट हैं कि यह केस मुख्यमंत्री के खिलाफ बनता है. राज्यपाल ने अपने पत्र में 2004 में मध्यप्रदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश का हवाला भी दिया है. जिसमें राज्यपाल इस तरह के केस को मंजूरी दे सकते हैं. राज्यपाल की इस परमिशन के बाद अब सिद्धारमैया के खिलाफ कोर्ट समन जारी कर सकता है और जांच एजेंसी केस दाखिल कर जांच शुरू कर सकती हैं. वहीं हाल ही में कर्नाटक के डिप्टी सीएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सिद्धारमैया के खिलाफ साजिश हो रही है. उन्होंने आशंका जताई थी कि सिद्धारमैया को जेल भेजकर सरकार गिराने की साजिश हो रही है. वहीं अब पूरे मामले को लेकर सिद्धारमैया भी कानूनी सलाह ले रहे हैं. कहा जा रहा है कि राज्यपाल के इस फैसले को कर्नाटक की सरकार कोर्ट में चुनौती दे सकती है.