पेरिस ओलंपिक 2024 के हॉकी मैच में भारत ने स्पेन को हराकर ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमा लिया है. इस मैच में हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने काफी अहम भूमिका निभाई है. कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने टीम इंडिया के लिए दोनों गोल किए. टीम इंडिया ने एक रोमांचक ब्रॉन्ज मेडल मैच में स्पेन को 2-1 से हरा दिया और इसके साथ ही लगातार दूसरे ओलंपिक में ब्रॉन्ज अपने नाम कर लिया.ओलंपिक खेलों में पहली बार भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे हरमनप्रीत सिंह ने आगे बढ़कर अपने दमदार प्रदर्शन से टीम का नेतृत्व किया है. जिसका नतीजा टीम की सफलता में भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. बता दें कि टोक्यो ओलंपिक के बाद भारतीय हॉकी टीम पेरिस से भी ओलंपिक ब्रॉन्ज जीतकर लौटी है.
पूरे टूर्नामेंट में सभी टीमों में सबसे ज्यादा गोल हरमनप्रीत के
हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने वो हैरतअंगेज कारनामा भी कर दिखाया जो ओलंपिक में आसान नहीं है. हरमनप्रीत ने ग्रुप स्टेज के पहले मैच से ही टीम की जीत में अपनी विस्फोटक ड्रैग फ्लिक से अहम योगदान दिया है. टीम के पेनाल्टी कॉर्नर स्पेशलिस्ट हरमनप्रीत ने ग्रुप स्टेज के 5 में से 4 मैचों में गोल किए. इसके बाद उन्होंने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया, सेमीफाइनल में जर्मनी और ब्रॉन्ज मेडल के मैच में स्पेन के खिलाफ भी गोल दागे. स्पेन के खिलाफ कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने टीम के लिए दो गोल जड़े. इस तरह भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान सभी टीमों में सबसे ज्यादा 10 गोल किए.
टोक्यो ओलंपिक में भी सबसे ज्यादा गोल दागे थे
टोक्यो ओलंपिक के दौरान भी हरमनप्रीत सिंह ने अपना दम दिखाया था. उस समय भी भारतीय हॉकी कप्तान ने भारत के लिए सबसे ज्यादा 6 गोल दागे थे. टोक्यो ओलंपिक में हरमनप्रीत की ड्रैग फ्लिक का ही जलवा कायम था कि भारतीय टीम ने ब्रॉन्ज मेडल मैच में जर्मनी जैसी टीम का डिफेंस भेदते हुए मुकाबले के साथ ही मेडल पर कब्जा कर लिया था. हरमनप्रीत टोक्यो ओलंपिक के दौरान टीम के कप्तान नहीं थे लेकिन उन्होंने अपना जलवा दिखाया था. इस बार हरमनप्रीत ने कप्तान रहते हुए पहले से भी बेहतर प्रदर्शन किया और सबसे ज्यादा गोल दागकर टीम की सफलता के सबसे बड़े स्टार बन गए.
हरमनप्रीत ने 15 साल की उम्र में ज्वॉइन की एकेडमी
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह का जन्म 6 जनवरी 1996 को हुआ था. हरमनप्रीत का जन्म अमृतसर के जंडियाला गुरु कस्बे के पास तिम्मोवाल गांव में एक सिख किसान परिवार में हुआ. हरमनप्रीत जब भी स्कूल से छुट्टी लेते तो अपने पिता के ट्रैक्टर पर होते थे. हरमन छुट्टियों में अपने परिवार की खेती में मदद किया करते थे. हरमनप्रीत के पिता ने उन्हें अपनी इच्छानुसार काम करने की छूट दे रखी थी. 10 साल की उम्र में हरमन ने हॉकी खेलना शुरू कर दिया था. हरमन ने 15 साल की उम्र में ही एकेडमी ज्वॉइन कर ली थी. अप्रैल 2015 में हरमनप्रीत सिंह को सीनियर टीम के लिए पहली बार कॉल-अप मिला. जब उन्हें जापान के खिलाफ 3 मैचों की बाइलेटरल सीरीज के लिए चुना गया था लेकिन हरमन को अगले टूर्नामेंट के लिए टीम से बाहर कर दिया गया. जो कि 2014-15 में होने वाला मेंस एफआईएच हॉकी विश्व लीग का सेमीफाइनल था. बता दें कि हरमनप्रीत सिंह भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए डिफेंडर के रूप में खेलते हैं और टीम के कप्तान भी हैं. उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ़्लिकर में से एक माना जाता है.