क्यों छोड़ा शेख हसीना ने आखिरकार अपना वतन, सामने आई ये बड़ी वजहें

आरक्षण को लेकर बांग्लादेश में हो रहे हिंसक प्रदर्शन बेकाबू होते जा रहे हैं. इस बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और ढाका छोड़ दिया है. वहीं शेख हसीना बांग्लादेश के पीएम पद से इस्तीफा के बाद भारत आ गई हैं. शेख हसीना फिलहाल गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर हैं और कहा जा रहा है वहां यहीं रुकेंगी. वहीं सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि छात्रों के प्रदर्शन से शुरू हुआ आंदोलन इतना कैसे बढ़ गया कि शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा?

30 फीसदी आरक्षण को लेकर मचा बवाल

बांग्लादेश में छात्रों ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था. छात्रों का ये प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक हो गया. स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को दिए जा रहे 30 फीसदी आरक्षण को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ है. छात्रों ने सरकार पर मेरिट के आधार पर सरकारी नौकरियां नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है. छात्रों का कहना है कि सरकार अपने समर्थकों को आरक्षण देने के पक्ष में है.

विपक्ष ने भी सरकार के खिलाफ किया व्यापक विरोध

आरक्षण को लेकर शुरु हुए छात्र आंदोलन को लेकर बांग्लादेश में विपक्षी दल भी फ्रंटफुट पर आ गए हैं. शेख हसीना सरकार के खिलाफ विपक्ष ने व्यापक विरोध किया. विपक्षी पार्टी बांग्‍लादेश नैशनल‍िस्‍ट पार्टी ने खालिदा जिया के नेतृत्‍व में लाखों की भीड़ जुटाकर शेख हसीना की कुर्सी को हिला दिया. हसीना से विपक्ष ने इस्तीफे की मांग की. सरकार भी विपक्ष के विरोध का सामना करने में विफल रही.

सेना ने सरकार का साथ देने से किया इंकार

बांग्लादेश में चल रहे प्रदर्शनों में सेना ने भी सरकार का साथ देने से मना कर दिया है. हिंसक प्रदर्शनों में 90 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इसके बाद बांग्लादेश की सेना ने कहा कि अब वह प्रदर्शनकारियों पर गोलियां नहीं चलाएंगे. सेना मुख्यालय में बांग्‍लादेश आर्मी चीफ ने हालात के बारे में चर्चा की और ऐलान किया कि अब प्रदर्शनकारियों पर एक भी गोली नहीं चलाई जाएगी.

हिंसा भड़काने में पाकिस्तान का हाथ

पाकिस्तान का आरक्षण को लेकर बांग्लादेश में हिंसा भड़काने में प्रमुख हाथ है. पाकिस्तान उच्चायोग पर बांग्लादेश की सिविल सोसायटी ने कट्टरपंथी छात्र प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने का आरोप लगाया है. पाकिस्तान अंदरखाने छात्रों को समर्थन के जरिए बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है. कुछ रिपोर्टों में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ‘मिशन पाकिस्तान’ समर्थक जमात से जुड़े छात्र प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग के संपर्क में है, जो बांग्लादेश में प्रतिबंधित है.

आंदोलन ने दिया आर्थिक स्थिति को दोगुना झटका

बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब थी. वहीं छात्रों के इस हिंसक आंदोलन ने एक और झटका दे दिया है. बांग्लादेश में तेजी से बेरोजगारी बढ़ रही है. लंबे समय से बांग्लादेश की सत्ता पर शेख हसीना काबिज हैं. हाल ही में जब शेख हसीना फिर से बांग्लादेश की पीएम बन गईं. तो बेरोजगारों छात्रों में गुस्सा और भी बढ़ गया. जिसके बाद छात्र सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने लगे.

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra