भारत का पड़ोसी देश में आरक्षण की आग सुलग रही है. आरक्षण की आग में जल रहे बांग्लादेश का तख्तापलट भी हो चुका है. यहां तक कि देश के बेकाबू हालातों के बीच शेख हसीना अपने पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ कर भारत आ पहुंची हैं. वहीं राजधानी ढाका में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी उनके आवास में घुस चुके हैं और जमकर उत्पात मचा रहे हैं. वहीं इन सबके बीच बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-ज़मान ने बड़ा ऐलान कर दिया है. सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-ज़मान ने ऐलान करते हुए कहा है कि बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार बनाई जाएगी. आपको बता दें कि इसी साल 23 जून को वकार-उज-जमान को देश के सेना प्रमुख पद की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने जनरल एस. एम. सैफुद्दीन की जगह ली थी. साल 1985 में इन्फैंट्री कॉर्प्स के अफसर के रूप में नियुक्त हुए जमान अब चीफ ऑफ जनरल स्टाफ हैं.
लंदन से रक्षा मामलों में मास्टर ऑफ आर्ट्स की ली डिग्री
16 सितंबर 1966 को शेरपुर जिले में जन्मे जमान ने डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद जमान ने लंदन से रक्षा मामलों में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री ली है. जमान को बांग्लादेश मिलिट्री अकादमी से ईस्ट बंगाल रेजिमेंट में 20 दिसंबर 1985 को 13वें बीएमए लॉन्ग कोर्स में कमीशन मिला था. उन्होंने नॉन-कमीशन ऑफिसर अकादमी, स्कूल ऑफ इन्फैंट्री एंड टैक्टिक्स और बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ पीस सपोर्ट ऑपरेशन ट्रेनिंग में पढ़ाया भी है.
2013 और 2017 में दो बार मिली सैन्य सचिव की जिम्मेदारी
सेना मुख्यालय की सैन्य सचिव शाखा में वकार-उज-जमान उप सहायक सैन्य सचिव भी रहे हैं. इसके साथ ही सहायक सैन्य सचिव और उप सैन्य सचिव के रूप में भी काम किया है. सेना सुरक्षा इकाई में वकार-उज-जमान ने सेवा करते हुए 17वीं ईस्ट बंगाल रेजिमेंट की कमान संभाली है. वहीं बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 46वीं स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड को भी लीड किया है. 2013 और 2017 में दो बार उनको सेना मुख्यालय में सैन्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई. जमान को 9वीं इन्फैंट्री डिवीजन में जीओसी और सावर क्षेत्र का एरिया कमांडर भी बनाया गया था. जमान को 30 नवंबर 2020 को लेफ्टिनेंट जनरल बनाया गया. मुस्तफिजुर रहमान की बेटी बेगम साराहनाज कमालिका रहमान से जमान की शादी हुई है. इनकी दो बेटियां हैं. 24 दिसंबर 1997 से 23 दिसंबर 2000 तक मुस्तफिजुर रहमान बांग्लादेश सेना के अध्यक्ष रहे. शेख हसीना के मुस्तफिजुर रहमान चाचा थे.
आरक्षण को लेकर हुए प्रदर्शनों में 300 लोगों की गई जान
आरक्षण को लेकर बांग्लादेश में जून के अंत में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था. ये आंदोलन 1971 में आजादी के लिए लड़ने वालों के रिश्तेदारों के लिए नौकरियों में दिए गए आरक्षण के खिलाफ था. इस मामले में सरकार ने अपने कदम पीछे खींचे थे और अधिकांश कोटा वापस भी लिया था. इसके बावजूद छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा.अब तक 300 लोगों की मौत हो चुकी है. ये प्रदर्शन मारे गए लोगों के लिए इंसाफ और शेख हसीना के इस्तीफे को लेकर किया जा रहा था. फिलहाल हसीना इस्तीफा देकर देश छोड़ चुकी हैं. बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबर रहमान की बेटी शेख हसीना साल 2009 से देश की बागडोर संभाल रही थीं. शेख हसीना लगातार चौथी बार और कुल पांच बार पीएम रहीं.