दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने के कारण तीन छात्रों की मौत हो गई. अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस मामले को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है. इस मुद्दे पर सपा नेता और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव खूब गरजे. वहीं इस दौरान अखिलेश यादव की पत्नी, सपा नेता और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव भी पीछे नहीं रहीं. उन्होंने भी कई मुद्दों को लेकर सरकार पर तीखे सवालों की बारिश कर दी.
यूपी में बुलडोजर अवैध इमारतों पर चलता है- अखिलेश
सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में बुलडोजर अवैध इमारतों पर चलता है. जहां अवैध इमारत बनती है वहां बुलडोजर चलता है क्या ये सरकार बुलडोजर चलवाएगी? आखिरकार प्लानिंग और एनओसी देने की जिम्मेदारी तो अधिकारियों की है तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है? उनके खिलाफ कार्रवाई क्या हो रही है? हम तो यूपी से देख रहे हैं कि अवैध बिल्डिंग पर बुलडोजर चलता है तो आखिर ये सरकार बुलडोजर चलाएगी या नहीं.
कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीणों को लेकर उठाया मुद्दा
वहीं इस दौरान सपा सांसद डिंपल यादव ने सदन पर एनडीए के खिलाफ निशाना साधते हुए कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाए. सपा सांसद डिंपल यादव ने कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीणों को लेकर सरकार पर सवाल दागे. इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘हमारा देश किसान प्रधान और कृषि प्रधान देश है लेकिन अगर हम युवाओं और किसानों का भविष्य सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं तो फिर कहीं ना कहीं हम सभी अपने फर्ज से डगमगा गए हैं. जहां वित्त मंत्री ने 9 प्राथमिकताओं की बात करते हुए कृषि को पहला स्थान दिया. वहीं मैं वित्त मंत्री से पूछना चाहती हूं कि देश में अभी कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर क्या है? जहां यह कहा गया था कि 2024 तक आप किसानों की आय दोगुनी कर देंगे और एमएसपी का वादा किया गया था. तो मैं पूछना चाहूंगी कि आज एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कितना बजट सरकार के द्वारा दिया जा रहा है. किसानों को इस बजट के तहत क्या मिला है. क्या पिछले 10 सालों में उत्तर प्रदेश में एक भी नई मंडी बनी है और क्या किसानों के लिए जरूरी किसी भी चीज के लिए सरकार ने जीएसटी को माफ हुआ? क्या सब्सिडी देने के वादे पर सरकार कायम रही.’
किसानों की समस्याओं का कितना निदान हआ- डिंपल
सपा सांसद ने कहा,’2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद यूपी में आए और किसानों को आवारा मवेशियों से हो रही समस्या से निजात दिलाने का वादा किया था. आज मैं पूछना चाहती हूं कि इस समस्या का कितना निदान हुआ, जिसकी वजह से हमारा देश चौकीदार बन गया. किसान रातभर जगे रहकर फसलों की सुरक्षा करते हैं क्या इसके लिए कोई प्रावधान है? क्या इसे बजट में जगह दी गई?’ इसके साथ ही डिंपल ने किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले करीब 700 किसानों और लखीमपुर में थार से किसानों को रौंदे जाने की घटना का हवाला देते हुए वित्त मंत्री से सवाल पूछते हुए कहा कि इस बार फसल बीमा योजना का लाभ कितने किसानों को मिला? डिंपल ने कहा कि अगर इसमें गिरावट आई है तो फिर कितनी गिरावट हुई है. ये बात सबके सामने रखी जानी चाहिए.
‘शिक्षा बजट को लेकर सरकार की नीयत साफ नहीं’
मैनपुरी सांसद ने आगे कहा कि ‘ये सरकार पिछले एक दशक से लगातार किसानों की अवहेलना कर रही है. गांवों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और जिसकी महंगाई सबसे बड़ी वजह है. जहां मनरेगा में सरकार ने 89 हजार करोड़ का बजट दिया है तो हमारी मांग है कि कम से कम 100 दिन का काम लोगों को मनरेगा के तहत सुनिश्चित करें और साथ ही मनरेगा का बजट 20% तक बढ़ाया जाए. कृषि के साथ हमारा शिक्षा बजट भी लगातार घटता जा रहा है. आज जहां यह केवल ढाई प्रतिशत है, जबकि यूनेस्को का बेंचमार्क है कि यह 4 से 6% तक रहना चाहिए. यूजीसी के फंड भी लगातार घटता जा रहा है. शिक्षा बजट में हो रही गिरावट दर्शाती है कि इस दिशा में सरकार की नियत साफ नहीं है’