हिंदू धर्म में सावन का महीना बेहद पवित्र माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है. इस महीने में अधिकतर लोग सनातन धर्म का पालन करते हुए शराब और मांस खाने से बचते हैं. लोगों की मानें तो इन दिनों में शराब और मांस का सेवन करने से बाबा भोलेनाथ रुष्ट हो जाते हैं. वहीं केवल धर्म ही नहीं साइंस भी इन दिनों शराब और मांस ना खाने की सलाह देती है.
सावन में बारिश के कारण पनपते हैं नए-नए कीड़े
दरअसल सावन के महीने में बारिश होती है. बारिश से जहां मौसम सुहाना होता है तो वहीं इस मौसम में नए-नए कीड़े भी पनपते हैं. इन कीड़ों को भोजन के रूप में चाहें घास-फूस मिले या मांस इन्हें क्या फर्क पड़ता है लेकिन इंसानों को पड़ता है. अगर आप इस महीने मांस का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाएं. क्योंकि ये कीड़े मांस को जरिया बनाकर आपकी आंतों तक आसानी से पहुंच कर आपको बीमार बना सकते हैं. इन्सान ही ये कीड़े जानवरों तक को बीमार कर सकते हैं. जानवर जो घास-फूस खाते हैं, उनके साथ अनजाने में बहुत सारे जहरीले कीड़े भी निगल लेते हैं. इससे जानवर बीमार हो जाते हैं. उनके शरीर में संक्रमण फैल जाता है. ऐसे जानवरों का मांस इंसानों के शरीर के लिए बहुत ही नुकसानदायक साबित होता है.
सावन के महीने में शरीर की इम्युनिटी होती है कमजोर
आयुर्वेद के मुताबिक सावन के महीने में शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है. शराब-मांस या तेल और तीखा खाने से हमारा पाचन तंत्र पर जोर पड़ेगा, क्योंकि इन्हें पचाना मुश्किल होता है. पाचन शक्ति कमजोर होने से नॉन-वेज फूड आंतों में सड़ने लगता है. इससे इम्युनिटी पर भी बुरा असर पड़ेगा. नॉनवेज और मसालेदार खाना एक तरह से बीमारियों का कारण बन सकता है. आयुर्वेद सलाह देता है कि सावन महीने में हल्का खाना चुनना चाहिए, जो आसानी से पच जाए. सावन में सोमवार के व्रत को भी इम्यूनिटी और पाचन शक्ति कमजोर होने से ही जोड़ा जाता है.
जानवरों की ब्रीडिंग के लिए सावन का मौसम अच्छा
जल और स्थलीय दोनों तरह के सैकड़ों जानवरों के प्रजनन यानी ब्रीडिंग के लिए सावन का मौसम अच्छा माना जाता है. ज्यादातर जीव इसी माह ब्रीडिंग करते हैं. यदि कोई ऐसा जीव खाता है जो प्रेग्नेंट है तो उससे शरीर को नुकसान पहुंचेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान प्रेग्नेंट जीव के शरीर में हार्मोनल डिस्टरबेंस होता है जिससे भविष्य में कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. सावन के महीने में बारिश होती रहती है. इससे वातावरण में फंगस, फफूंदी और फंगल इंफेक्शन बढ़ने लगते हैं. नमी का मौसम वायरस और कीटाणुओं के लिए प्रजनन की अनुकूल स्थिति होता है. इसलिए इस समय खाने-पीने का सामान जल्दी खराब होने लगता है. ऐसा खाना खाने से फीवर, फ्लू होने का खतरा बढ़ जाता है.