कितना घातक है चांदीपुरा वायरस, फेफड़ों से होकर कैसे दिमाग में कर रहा अटैक, पढ़ें इस रिपोर्ट में

कोरोना वायरस के बाद देश में एक और वायरस ने दस्तक दे दी है. ये वायरस 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा शिकार बनाता है. वायरस के कारण इस उम्र के बच्चों में ही सबसे ज्यादा मृत्यु दर देखी गई है. इस वायरस के मामले में लगातार इजाफा हो रहा है. इस वायरस से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 12 हो चुकी है. चांदीपुरा वायरस के केस गुजरात में आए थे, लेकिन अब इस वायरस ने महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बच्चों को अपने चपेट में लेना शुरू कर दिया है.सभी बच्चों के खून के सैंपल पुणे की राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजे गए हैं. गुजरात के सबारकांठा, आरवल्ली, महिसागर औऱ राजकोट में इसके मामले सामने आए हैं. गुजरात के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि जहां चांदीपुरा वायरस के फैलाव सामने आया है वहां अबतक 8600 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है. यहां पूरे इलाके को 26 जोन में बांटा गया है. यह वायरस फेफड़ों से होकर दिमाग में जाता है और मौत का कारण बनता है. केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान को अलर्ट पर रखा गया है. इस बीमारी में डेथ रेट 50 प्रतिशत तक है.

लंग्स के माध्यम से सीधे दिमाग में चला जाता है वायरस

एम्स नई दिल्ली में बच्चों के रोग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एम वाजपेयी ने कहा कि गुजरात के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से स्क्रीनिंग और तमाम तरह के उपाय किए जा रहे हैं. यह वायरस बहुत तेजी से ब्रेन में फैल जाता है. इस बीमारी का फ्लूड से भी ट्रांसमिशन होता है. इसके टीके पर काम चल रहा है लेकिन अबतक सफलता नहीं मिली है. डॉ. एम वाजपेयी ने बताया कि इस बीमारी में चांदीपुर वायरस का जब संक्रमण होता है तो लंग्स के माध्यम से वायरस सीधे दिमाग में चला जाता है. यह रोगज़नक़ रैबडोविरिडे परिवार के वेसिकुलोवायरस जीनस का सदस्य है. यह मच्छरों, टिक्स और सैंडफ़्लाइज़ सहित वैक्टर द्वारा फैलता है. इसमें आमतौर पर फ्लू वाले लक्षण बच्चों में होता है. बच्चों में उलटी आना, डायरिया, बदन दर्द बढ़ता चला जाता है. इससे बहुत जल्द बच्चा कोमा में चला जाता है. दिमाग में सूजन हो जाता है और फिर बच्चे की मौत हो जाता है. सूत्रों की मानें तो गुजरात के जिन इलाकों में यह वायरस के संक्रमण की सूचना मिल रही है वहां तेजी से सर्विलांस को बढ़ा दिया गया है. इसके साथ ही सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से एडवाजरी भी जारी की जा रही है. इन इलाकों में यदि कोई सदिग्ध मरीज आ रहा है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर ट्रीट किया जाए इस तरह के दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं.

1966 में पहली बार महाराष्ट्र में सामने आया केस

चांदीपुरा वायरस साल 1966 में पहली महाराष्ट्र में इससे जुड़ा केस रिपोर्ट किया गया था. नागपुर के चांदीपुर में इस वायरस की पहचान हुई थी, इसीलिए इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ गया. इसके बाद इस वायरस को साल 2004 से 2006 और 2019 में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में रिपोर्ट किया गया. बता दें कि चांदीपुरा वायरस एक RNA वायरस है, जो सबसे ज्यादा मादा फ्लेबोटोमाइन मक्खी से फैलता है. इसके फैलने के पीछे मच्छर में पाए जाने वाले एडीज जिम्मेदार हैं.

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra