हमारे देश में कई ऐसे मंदिर हैं जो लोगों की अटूट आस्था का प्रतीक हैं. इन मंदिरों में आने वाले कुछ लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी होने रक भगवान को भोग और प्रसाद से खुश करते हैं तो वहीं कुछ संपन्न लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी कामनाए पूरी होने पर भगवान को आभूषणों की भेंट चढ़ाते हैं. इसी कड़ी में एक ऐसा मंदिर भी है जिसका रत्न भंडार करीब 46 सालों से खोला ही नहीं गया है. जबकि हर तीन साल में रत्न भंडार खोलकर उसके अंदर रखे आभूषणों और अन्य जवाहरातों की जांच करने का नियम है. ये मंदिर कोई और नहीं बल्कि ओडिशा के पुरी में बना भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर है. बता दें कि बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि अगर ओडिशा में उसकी सरकार बनती है तो पुरी जगन्नाथ मंदिर के चारों प्रवेश द्वारों को खोला जाएगा और रत्न भंडार भी खुलेगा. जिसके बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सबसे पहला फैसला पुरी मंदिर के चारों प्रवेश द्वारों को खोलने का लिया और रत्न भंडार खोलने के लिए उच्च न्यायालय के सीटिंग जज की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय समिति गठित की गई. जिसके बाद अब रत्न भंडार खुलवाकर भाजपा सरकार ने अपना वादा निभाया है.
1978 के बाद से नहीं खुले पट
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर का प्रतिष्ठित रत्न भंडार रविवार को 46 साल बाद फिर से खोला गया. इससे पहले 1978 में रत्न भंडार के दरवाजे खोले गए थे. इस काम के लिए राज्य सरकार द्वारा 11 सदस्यों की एक टीम का गठन किया गया था. ओडिशा हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बिश्वनाथ रथ की अध्यक्षता वाली इस टीम में, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर अरबिंद पाढ़ी, एएसआई अधीक्षक डीबी गडनायक और पुरी के राजा ‘गजपति महाराजा’ भी शामिल थे. टीम टीम ने मंदिर के अंदर 14 जुलाई की दोपहर 1:28 बजे प्रवेश किया. साल 2018 में ओडिशा के तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि जब 1978 में रत्न भंडार के दरवाजे खोले गए थे, तब करीब 140 किलो सोने के गहने, 256 किलो चांदी के बर्तन मिले थे. पुरी मंदिर प्रशासन के मुताबिक इन आभूषणों में कीमती पत्थर जड़े थे. पिछले साल अगस्त में जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने राज्य सरकार से सिफारिश की थी कि रत्न भंडार 2024 की वार्षिक रथ यात्रा के दौरान खोला जाए. ऐसी अफवाहें थीं कि रत्न भंडार में सांप मौजूद हैं जो प्रभु जगन्नाथ के खजाने की रक्षा करते करते हैं. लेकिन समिति के सदस्यों ने बताया कि खजाने के अंदर कोई सांप नहीं मिले.
46 साल बाद ओडिशा सरकार की अनुमति के बाद खुले दरवाजे
दरअसल जगन्नाथ मंदिर ओडिशा में होने के कारण यहां की सरकार यानि की ओडिशा सरकार की अनुमति के बाद ही खोला जा सकता है लेकिन गत 46 वर्षों से इस प्रक्रिया का पालन नहीं हो सका. इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई पड़ी. जिसके बाद आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के आग्रह पर साल 2018 में ओडिशा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निरीक्षण के लिए पुरी जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार खोलने की अनुमति देने का निर्देश दिया था. जिसके जवाब में ओडिशा सरकार की ओर से कहा गया कि रत्न भंडार की चाबियां नहीं मिल रहीं. जानकारी के अनुसार रत्न भंडार की चाबियां पुरी कलेक्टर के पास रखी होती हैं. तत्कालीन कलेक्टर अरविंद अग्रवाल ने हाई कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि चाबियां कहां रखी हैं, यह पता नहीं चल पा रहा. तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसके बाद एक समिति का गठन करके उसे मामले की जांच का आदेश दिया. समिति ने बताया कि रत्न भंडार की दो चाबियां मौजूद हैं. बता दें कि पुरी जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार लूटने के लिए 15 बार आक्रमण हुआ. पहली बार 1451 में और आखिरी बार 1731 में मोहम्मद तकी खां द्वारा मंदिर पर हमला किया गया था.
11 सदस्यीय टीम ने विधि-विधान पूर्वक खोले दरवाजे
भगवान जगन्नाथ की निधि होने के कारण पुरी मंदिर के रत्न भंडार को लेकर भक्तों में भी गहरी आस्था का भाव है. इसलिए 11 सदस्यीय टीम की उपस्थिति में रत्न भंडार के दरवाजे खोले जाने से पहले विधि-विधानपूर्वक प्रभु जगन्नाथ की पूजा की गई और पूरी प्रक्रिया के सफल होने के लिए उनका आशीर्वाद लिया गया. यह रत्न भंडार भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए गए बहुमूल्य सोने और हीरे के आभूषणों का घर है. रत्न भंडार के दो कक्ष हैं- भीतर भंडार (आंतरिक खजाना) और बाहरी भंडार (बाहरी खजाना). ओडिशा मैग्जीन में कहा गया है कि बाहरी खजाने में भगवान जगन्नाथ के सोने से बने मुकुट, सोने के तीन हार (हरिदाकंठी माली) हैं, जिनमें से प्रत्येक का वजन 120 तोला है. रिपोर्ट में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के सोना से बने श्रीभुजा और श्रीपयार का भी उल्लेख किया गया है. इसके मुताबिक आंतरिक खजाने में करीब 74 सोने के आभूषण हैं, जिनमें से प्रत्येक का वजन 100 तोला से अधिक है. सोने, हीरे, मूंगा और मोतियों से बनी प्लेटें हैं. इसके अलावा 140 से ज्यादा चांदी के आभूषण भी खजाने में रखे हुए हैं. ओडिशा की राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित एक मैग्जीन के अनुसार, राजा अनंगभीम देव ने भगवान जगन्नाथ के आभूषण तैयार करने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में सोना दान किया था.
बाहरी रत्न भंडार का सामान लकड़ी के 6 संदूकों में सील
पुरी मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी के मुताबिक बाहरी रत्न भंडार का सामान लकड़ी के 6 संदूकों में रखकर सील कर दिया गया है, लेकिन रत्न भंडार के अंदरूनी हिस्से का सामान अभी संदूक में शिफ्ट नहीं गया है. यह काम बहुडा यात्रा और सुना वेशा के बाद किया जाएगा. रत्न भंडार में मौजूद रत्नों, आभूषणों और अन्य वेशकीमती चीजों की गिनती और मरम्मत की जाएगी. इनकी संख्या, गुणवत्ता, वजन, फोटो संबंधित डिजिटल कैटलाग भी तैयार किया जाएगा, जिसे भविष्य में एक रेफरेंस डाक्यूमेंट के तौर पर उपयोग किया जाएगा. हालांकि, कल खोले गए रत्न भंडार में क्या क्या चीजें मिलीं, इसे लेकर 11 सदस्यीय टीम की ओर से कोई खुलासा नहीं किया गया है.