जहां लोकसभा चुनावों में बीजेपी को भगवान राम की नगरी अयोध्या में करारी मात मिली थी जिसकी पार्टी को उम्मीद भी नहीं थी. वहीं अब एक बार फिर पार्टी को भगवान विष्णु की नगरी बद्रीनाथ में हार का सामना करना पड़ा है. दरअसल पार्टी ने जिस प्रत्याशी पर दांव खेला वो कोई और नहीं कांग्रेस का बागी उम्मीदवार था. देखा जाए तो जनता अब दलबदलू नेताओं को भी सिरे से नकार रही है. चमोली बद्रीनाथ में भाजपा को गलत प्रत्याशी पर दांव लगाना भारी पड़ गया. जिसे अब ना तो पार्टी पचा पा रही है और ना ही जनता पार्टी का ये दांव समझ पा रही है.
राजेंद्र भंडारी को जनता ने दिया करारा झटका
दरअसल गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने लोकसभा चुनाव से पहले राजेंद्र भंडारी को भाजपा में शामिल करवाया था, लेकिन यह अब भाजपा के ही गले की हड्डी बन गए हैं. जनता ने लोकसभा चुनाव में बेवजह की तोड़फोड़ को मास्टर स्ट्रोक बताने वालों को उपचुनाव के नतीजों के साथ करारा जवाब दिया है. कांग्रेस से भाजपा में लाए गए राजेंद्र भंडारी के लिए वोट मांगने प्रदेश के बूथ लेवल कार्यकर्ता से लेकर पूरी कैबिनेट बद्रीनाथ विधानसभा में घूम रही थी लेकिन जनता के मन की बात कोई नहीं समझ पाया. अब जनता ने भाजपा और कांग्रेस से भाजपा में आए राजेंद्र भंडारी को एक झटके में झटक दिया है. बद्रीनाथ विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया है कि जनता जबरदस्ती के थोपे चुनाव और दल बदलू नेता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है. एक तरफ जहां जनता की नाराजगी साफ-साफ इस उपचुनाव के परिणाम में देखने को मिल रही है, वहीं अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी उनके प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है.
2022 में बीजेपी की प्रचंड लहर के बाद भी जीते थे भंडारी
विधानसभा चुनाव 2022 में पूरे प्रदेश में भाजपा की प्रचंड लहर थी लेकिन गढ़वाल क्षेत्र में बद्रीनाथ विधानसभा में एकमात्र कांग्रेस के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह भंडारी मोदी लहर और भाजपा की प्रचंड लहर के बावजूद जीत गए और विधायक चुने गए. 2024 लोकसभा चुनाव से पहले गढ़वाल अनिल बलूनी ने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राजेंद्र भंडारी को दिल्ली में भाजपा में शामिल कराया था. भाजपा इसे लोकसभा चुनाव में मास्टरस्ट्रोक मानती रही. हालांकि लोकसभा चुनाव तो जीते लेकिन उपचुनाव में जनता ने इसे पटखनी दे दी. जनता की नजरों से देखा जाए तो विकास को मुद्दा बनाकर राजेंद्र भंडारी ने पार्टी छोड़ी थी. उन्होंने कहा था कि मेरे क्षेत्र में विकास नहीं हो रहा है. हालांकि किसी ने भी इसकी शिकायत नहीं की थी लेकिन इसके बावजूद भंडारी भाजपा में शामिल हो गए. जो कि जनता को बिल्कुल भी रास नहीं आया