भगवान भोले भंडारी का प्रिय मास का 22 जुलाई से आगाज होने वाला है. भगवान शिव शंकर के भक्त इस दिन से शिवालयों में बाबा की आराधना में डूब जाएंगे. वहीं इस सावन के महीने में मंगला गौरी का व्रत भी होता है, जो कि लड़कियां और महिलाएं रखती हैं. महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए तो लड़कियां अच्छे वर की कामना के लिए ये व्रत करती हैं. मंगला गौरी का व्रत सावन के पहले सोमवार के अगले दिन पड़ेगा यानि की 23 जुलाई. इस बार 4 मंगला गौरी व्रत पड़ने वाले हैं. आखिरी मंगला गौरी व्रत 13 अगस्त को पड़ेगा.
मंगला गौरी व्रत में कथा सुनने का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं की मानें तो सावन के पवित्र महीने में मंगला गौरी व्रत रखने से सुहागिन महिलाओं के वैवाहिक जीवन की सभी समस्याओं का निराकरण हो जाता है. वहीं कुंवारी लड़कियां ये व्रत मनचाहे वर की चाह में रखती हैं. जो भी इस व्रत को रखें उसे व्रत के दौरान मंगला गौरी व्रत कथा को जरूर सुनना और पढ़ना चाहिए. बिना कथा के ये व्रत अधूरा माना जाता है. साथ ही सुहागिनों को इस दिन श्रृंगार दान करना भी काफी शुभ माना जाता है.
क्या है मंगला गौरी व्रत की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में धर्मपाल नामक एक सेठ था, उसके पास धन संपत्ति की कोई कमी नहीं थी. वह स्वयं सर्वगुण संपन्न था. देवों के देव महादेव का भक्त था. कालांतर में सेठ धर्मपाल की शादी गुणवान वधू से हुई. हालांकि, विवाह के बाद कई वर्षों तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई. इससे सेठ चिंतित रहने लगा. वह सोचने लगा कि अगर संतान नहीं हुई, तो उसके कारोबार का कौन उत्तराधिकारी होगा? एक दिन सेठ धर्मपाल की पत्नी ने संतान के संबंध में किसी प्रकांड पंडित से संपर्क करने की सलाह दी. पत्नी के वचनानुसार, सेठ नगर के सबसे प्रसिद्ध पंडित के पास जाकर मिले. उस समय गुरु ने सेठ दंपत्ति को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना करने की सलाह दी. कालांतर में सेठ धर्मपाल की पत्नी ने विधि विधान से महादेव और माता पार्वती की पूजा-उपासना की. सेठ धर्मपाल की पत्नी की कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन माता पार्वती प्रकट होकर बोली- हे देवी! तुम्हारी भक्ति से मैं अति प्रसन्न हूं, जो वर मांगना चाहते हो! मांगो. तुम्हारी हर मनोकामना अवश्य पूरी होगी. उस समय सेठ धर्मपाल की पत्नी ने संतान प्राप्ति की कामना की. माता पार्वती ने संतान प्राप्ति का वरदान दिया. हालांकि, संतान अल्पायु था. एक वर्ष पश्चात, धर्मपाल की पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया. जब पुत्र का नामकरण किया गया, तो उस समय धर्मपाल ने माता पार्वती के वचन से ज्योतिष को अवगत कराया. तब ज्योतिष ने सेठ धर्मपाल को पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से करने की सलाह दी. ज्योतिष के वचनानुसार, सेठ धर्मपाल ने अपने पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से की. कन्या के पुण्य प्रताप से धर्मपाल का पुत्र मृत्यु पाश से मुक्त हो गया.