शायराना अंदाज में दिखे अखिलेश ने छोड़े शब्द बाण, BJP सांसद सुनकर हो गए परेशान, अयोध्या के सांसद के जरिए दिया प्रेम का पैगाम !

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है. जहां एक जुलाई को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर अपना अभिभाषण शुरू किया और सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए हिंदुओं पर विवादित बयान दे दिया. वहीं आज 2 जुलाई को राहुल गांधी के अभिभाषण की बची-खुची कसर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पूरी कर दी. जहां एक ओर अखिलेश यादव ने एनडीए सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए अयोध्या जीत पर सरकार की चुटकी ली. साथ ही कविता के शब्द बाणों से सरकार पर जमकर कटाक्ष भी किए.

अब मनमर्जी नहीं जनमर्जी का राज
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने भाषण की शुरुआत 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन की तुलना 4 जून यानी लोकसभा चुनावों के परिणाम वाले दिन से करते हुए की. उन्होंने कहा कि 15 अगस्त देश की आजादी का तो 4 जून का दिन सांप्रदायिक राजनीति से आजादी का दिन है. 2024 के लोकसभा चुनाव में तोड़ने वाली राजनीति की हार और जोड़ने वाली राजनीति की जीत हुई. अखिलेश यादव के अनुसार देश का संविधान ही देश की संजीवनी है और इस लोकसभा चुनाव में संविधान रक्षकों की जीत हुई है. अब ये देश किसी की व्यक्तिगत आकांक्षाओं से नहीं बल्कि जनता की जन-आकांक्षाओं से चलेगा. यानी अब मनमर्जी नहीं जनमर्जी का राज होगा.

हारी हुई सरकार सत्ता पर काबिज
इस दौरान उन्होंने यूपी का भी जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी जहां से आते हैं, वहां की सरकार कह रही है कि 3 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाएंगे. जिसके लिए 35 फीसदी ग्रोथ रेट चाहिए, जो मुझे नहीं लगता कि यूपी हासिल कर पाएगा. इस दौरान सपा मुखिया ने जहां एक ओर जनता का धन्यवाद किया तो वहीं सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि हारी हुई सरकार सत्ता पर काबिज है. जनता का कहना है कि ये सरकार चलने वाली नहीं बल्कि गिरने वाली सरकार है.

शायरी और कविता के जरिए छोड़े शब्द बाण
वहीं अपने अभिभाषण के दौरान अयोध्या की जीत पर केंद्रित एक कविता भी सुनाई. जिसमें सबसे अहम भूमिका सपा सांसद अवधेश प्रसाद की थी जो कि अयोध्या में बीजेपी उम्मीदवार लल्लू सिंह को हराकर सदन में आए है. अखिलेश के कविता पाठ के दौरान कई बार जय अवधेश के नारे लगे. अखिलेश ने कविता कहते हुए कहा कि एक और जीत हुई है, मैं जानता हूं सत्‍ता पक्ष में बैठने वाले लोग समझ गए होंगे. अयोध्‍या की जीत भारत के परिपक्‍त मतदाता के लोकतंत्र के समझ की जीत है और हम तो अध्‍यक्ष महोदय यही सुनते आए हैं होय है वही जो राम रची राखा. ये है उसका फैसला. जिसकी लाठी में नहीं होती आवाज, जो करते थे किसी को लाने का दावा, वो हैं किसी के सहारे के लाचार. हम अयोध्‍या से लाए हैं उनके प्रेम का पैगाम. जो सच्‍चे मन से करते हैं सबका कल्‍याण. सदियों में जन जन गाता है, जिनके गान. अभयदान देती है, जिनकी मंद मंद मुस्‍कान. मानतवा के लिए उठता जिनका तीर कमान. जो असत्‍य पर सत्‍य की जीत का है नाम. उफनती नदी पर जो बांधे मर्यादा के बांध. वो है अवध के राजा पुरुषोत्‍तम प्रभु राम. हम अयोध्‍या से लाए हैं उनके प्रेम का पैगाम. इसके बाद उन्‍होंने आगे कहा… कुछ बातें समय और काल से परे होती हैं. इसलिए आज यहां उत्‍तर प्रदेश के सदन में पढ़ा गया एक शेर याद आ गया. जो तब सही था और अब और सही साबित हो रहा है. इजाजत हो तो मैं अर्ज करूं. हुजुर-ए-आला आज तक खामोश बैठे हैं इसी गम में. महफि‍ल लूट ले गया कोई, जबकि सजाई हमने.. इतने में साथ बैठे अवधेश प्रसाद अखिलेश यादव से बोलते हैं योगी जी के लिए.. यह सुनकर अखिलेश हंस पड़ते हैं.

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra