भारत और यूरोप के 4 देशों के संगठन यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच 10 मार्च को एक अहम समझौता हुआ। FTA के तहत EFTA ने अगले 15 साल में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इस पर इंटीग्रेटेड चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ICCI) के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. संदीप पचपांडे कहते हैं कि EFTA देशों के द्वारा किए जाने वाले निवेश में फार्मा, हेल्थ से जुडे उपकरण और फूड सेक्टर हैं, ऐसे में इन सेक्टर्स में लाखों नौकरियां पैदा होने की संभावना है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी कह चुके हैं कि इस डील से 10 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।
समझौते की बड़ी बातें
1. 15 साल में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश होगा
2. फार्मा, हेल्थ सेक्टर में पैदा होंगी लाखों नौकरियां
3. क़रीब 10 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान
4. डील में शामिल सभी देश विकसित हैं
5. रोज़गार और विकास के क्षेत्र में होगा इजाफा
EFTA के सदस्य देशों में आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल है, इस डील में सभी के लिए मौका है और डील से जुड़े सभी देशों को इससे फायदा होगा। वाईस प्रेजिडेंट ICCI ने FTA पर हस्ताक्षर को ऐतिहासिक पल बताते हुए कहते हैं कि भारत का ऐसे समूह के साथ पहला आधुनिक व्यापार करार है, जिसमें विकसित देश शामिल हैं।
समझौते में 14 अध्याय हैं, जिनमें वस्तुओं के व्यापार, उत्पत्ति के नियम, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), सेवाओं का व्यापार, निवेश प्रोत्साहन और सहयोग, सरकारी खरीद, व्यापार में तकनीकी बाधाएं और व्यापार सुविधा शामिल है। भारत को EFTA से अधिक विदेशी निवेश मिलेगा, साथ ही अच्छी नौकरियों में वृद्धि होगी। कुल मिलाकर टीईपीए से हमें अपनी आर्थिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने और भारत और ईएफटीए दोनों के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
