बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बार फिर अपने वतन लौटने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह दिसंबर 2026 में बांग्लादेश वापस जाएंगी। इसके लिए उन्हें मौत की सजा, गिरफ्तारी या जेल जाने का डर भी नहीं है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) को दिए एक ईमेल इंटरव्यू में हसीना ने साफ कहा कि अगस्त 2024 में देश छोड़ने के बाद से उनका लौटने का फैसला नहीं बदला है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी वापसी के लिए भारत या किसी दूसरे देश की मदद की जरूरत नहीं है।
मौत का डर नहीं, अपने देश लौटेंगी हसीना
शेख हसीना ने कहा कि अगर उनकी किस्मत में मौत लिखी है, तो वह अपने देश की जमीन पर और अपने लोगों के बीच मरना पसंद करेंगी। उन्होंने माना कि बांग्लादेश लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, जेल भेजा जा सकता है या जान का खतरा भी हो सकता है। इसके बावजूद वह अपने देश वापस जाना चाहती हैं। उनका कहना है कि वह अपने लोगों से दूर रहकर उनकी परेशानियां नहीं देख सकतीं।
भारत या अमेरिका से नहीं मांगेंगी मदद
हसीना ने अपनी सुरक्षित वापसी के लिए भारत या अमेरिका से बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाने की मांग नहीं की है। उन्होंने कहा कि वह सभी देशों के साथ अच्छे संबंध और सहयोग चाहती हैं, लेकिन अपने देश लौटने के लिए किसी विदेशी ताकत की मंजूरी की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह भारत से बांग्लादेश कैसे लौटेंगी।
प्रदर्शन के बाद छोड़ना पड़ा था देश
शेख हसीना 2009 से अगस्त 2024 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। छात्र आंदोलन के बाद बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के चलते उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी और देश से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी। हसीना ने आरोपों और फैसले को खारिज किया है।
अवामी लीग पर कार्रवाई का लगाया आरोप
हसीना ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, अगस्त 2024 के बाद से पार्टी के कम से कम 20 हजार सदस्य मारे जा चुके हैं। हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया या प्रताड़ित किया गया है। हालांकि, ये आंकड़े हसीना के दावे हैं। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि गिरफ्तारियां अलग-अलग आरोपों के आधार पर की जा रही हैं।
तारिक रहमान की सरकार पर भी उठाए सवाल
हसीना के सत्ता से हटने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद फरवरी में हुए चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान सत्ता में आए। हसीना ने नई सरकार पर अवामी लीग को राजनीतिक रूप से कमजोर करने और उसके समर्थकों पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि देश में सामान्य लोकतांत्रिक माहौल नहीं है।
बांग्लादेश में कट्टरपंथ के बढ़ते असर पर चिंता
शेख हसीना ने बांग्लादेश में चरमपंथी संगठनों के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में ऐसे तत्व ज्यादा मजबूत हो रहे हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदायों और उदारवादी विचारधारा वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने भी नागरिक और राजनीतिक अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या हसीना दिसंबर में वास्तव में बांग्लादेश लौटेंगी।