दिवाली का त्योहार सिर्फ दीप जलाने और खुशियां मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दौरान कई खास धार्मिक परंपराएं भी निभाई जाती हैं। इन्हीं में से एक है काली चौदस, जिसे भूत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां काली की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। खासतौर पर गुजरात और पश्चिम भारत के कई इलाकों में यह पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। साल 2026 में इस त्योहार की तारीख को लेकर लोगों के मन में असमंजस है। आइए जानते हैं काली चौदस कब मनाई जाएगी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।
काली चौदस 2026 की सही तारीख
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में काली चौदस का पर्व 7 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। महानिशीथ काल में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की रात को होने के कारण इसी दिन काली चौदस मनाई जाएगी।
जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
काली चौदस पर आधी रात में मां काली की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस समय को महानिशीथ काल कहा जाता है। साल 2026 में पूजा का शुभ समय 7 नवंबर की रात 11 बजकर 39 मिनट से 8 नवंबर को रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। पूजा के लिए कुल 52 मिनट का समय मिलेगा।
क्यों मनाई जाती है काली चौदस?
काली चौदस को भूत चतुर्दशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां काली की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों और बुरी ऊर्जा से रक्षा होती है। मां काली को शक्ति, साहस और बुराई का नाश करने वाली देवी माना जाता है। भक्त इस दिन उनकी आराधना करके जीवन से भय, परेशानियां और बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
इस तरह करें मां काली की पूजा
काली चौदस के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और मां काली का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। रात में शुभ मुहूर्त के दौरान मां की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान मां काली के मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि इससे मन को शक्ति और आत्मविश्वास मिलता है।
हनुमान जी की पूजा का भी महत्व
काली चौदस के दिन मां काली के साथ हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करना विशेष महत्व रखता है।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काली चौदस बुराई पर अच्छाई और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत का प्रतीक है। मां काली का उग्र स्वरूप अधर्म, अन्याय और बुरी शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। गुजरात और पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों में इस पर्व को लेकर खास उत्साह रहता है। भक्त मां काली से परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं।