उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर जेल में बंद वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब 45 मिनट तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश ने आजम खान के खिलाफ हुई कार्रवाई को अन्याय बताया। उन्होंने कहा, “आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे।” अखिलेश ने आरोप लगाया कि आजम खान और उनके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाया गया है। इस मुलाकात को सपा की आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
आजम खान से बार-बार क्यों मिल रहे अखिलेश?
अखिलेश यादव और आजम खान के बीच मुलाकातों का सिलसिला पुराना है। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भी अखिलेश सीतापुर जेल में आजम खान से मिलने पहुंचे थे। सितंबर 2025 में रिहाई के बाद उन्होंने आजम के रामपुर स्थित आवास पर भी मुलाकात की थी। अब दोबारा जेल पहुंचकर अखिलेश ने संकेत दिया है कि पार्टी में आजम खान की अहमियत बनी हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आजम का राजनीतिक प्रभाव सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर नजर
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटी है। पार्टी को कांग्रेस के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर भी फैसला करना होगा। ऐसे में आजम खान के अनुभव और उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों को अहम माना जा रहा है। हालांकि, जेल में हुई मुलाकात के दौरान किन सीटों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी राजनीतिक गलियारों में इसे चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पश्चिमी यूपी की सीटों पर आजम का कितना प्रभाव?
आजम खान का प्रभाव खासतौर पर रामपुर और आसपास के इलाकों में माना जाता है। वह कई बार विधायक और सांसद रह चुके हैं तथा उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे हैं। सपा के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में उनकी गिनती होती रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उम्मीदवारों के चयन के दौरान उनकी राय महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में पार्टी के लिए उनके राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल करना आगामी चुनाव में फायदेमंद हो सकता है।
ओवैसी की रैली के बाद बढ़ी सियासी चर्चा
अखिलेश यादव के रामपुर दौरे से तीन दिन पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यहां रैली की थी। ओवैसी ने सपा पर मुस्लिम नेताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने आजम खान के मामले को लेकर भी सवाल उठाए। ऐसे में अखिलेश की आजम से मुलाकात को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह घटनाक्रम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक समर्थन को लेकर जारी बहस को भी सामने लाता है।
ओवैसी पर अखिलेश का तीखा हमला
आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने ओवैसी पर भी निशाना साधा। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण ने भी एक दिन के लिए वेशभूषा बदली थी और मां सीता का हरण किया था। अखिलेश के इस बयान को ओवैसी की राजनीति पर तंज माना जा रहा है। अब देखना होगा कि आजम खान से मुलाकात और इस बयान का आगामी चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल, उत्तर प्रदेश में सपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिख रही है।