Health Tips: मल में खून आना सिर्फ बवासीर नहीं! कहीं कोलन कैंसर का संकेत तो नहीं, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

पॉटी करते समय खून आना, बार-बार कब्ज होना या पेट साफ करने में परेशानी होना आमतौर पर लोग बवासीर समझ लेते हैं। लेकिन हर बार इन समस्याओं की वजह पाइल्स ही हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार ये कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों को समझना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।

पाइल्स और कोलन कैंसर में क्या है अंतर?

पाइल्स यानी बवासीर में गुदा के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे पॉटी करते समय खून आ सकता है। वहीं, कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में होने वाला कैंसर है। दोनों के कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, जैसे मल में खून आना और मल त्याग की आदतों में बदलाव। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद बीमारी का अंदाजा लगाना सही नहीं है।

कोलन कैंसर के इन संकेतों पर दें ध्यान

कोलोरेक्टल कैंसर होने पर मल में खून आना, लगातार कब्ज या दस्त रहना, पेट में दर्द होना और मल त्याग की आदत बदलना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। इसके अलावा बिना किसी वजह वजन कम होना, लगातार थकान महसूस होना और शरीर में खून की कमी भी इसके संकेत हो सकते हैं। अगर ये परेशानियां लंबे समय तक बनी रहें या बार-बार हों, तो इन्हें सामान्य समझकर टालना नहीं चाहिए।

दुनिया भर में बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2022 में दुनिया भर में कोलोरेक्टल कैंसर के लगभग 19 लाख नए मामले सामने आए और 9 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। यह दुनिया में तीसरा सबसे आम कैंसर था। इस बीमारी की समय पर पहचान होने से इलाज के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार कोलोनोस्कोपी और बायोप्सी की मदद से बीमारी का पता लगा सकते हैं।

कैसे होती है कोलन कैंसर की शुरुआत?

कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत या मलाशय की अंदरूनी परत से शुरू होता है। कई मामलों में इसकी शुरुआत पॉलीप नाम की छोटी गांठों से हो सकती है। हालांकि, सभी पॉलीप कैंसर में नहीं बदलते। कुछ प्रकार के पॉलीप समय के साथ कैंसर का रूप ले सकते हैं। स्क्रीनिंग के दौरान ऐसे पॉलीप की पहचान कर उन्हें हटाया जा सकता है, जिससे कैंसर का खतरा कम करने में मदद मिलती है।

बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें

आंतों को स्वस्थ रखने के लिए फल, सब्जियां और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं। पर्याप्त पानी पिएं और रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलने जैसी शारीरिक गतिविधि करें। तला-भुना और प्रोसेस्ड मीट सीमित मात्रा में लें। उम्र और जोखिम के अनुसार डॉक्टर से कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात, मल में खून आने या कब्ज और दस्त की आदतों में लगातार बदलाव होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। हर छह महीने में जांच कराना सभी के लिए जरूरी नहीं है; जांच की जरूरत व्यक्ति की उम्र, लक्षणों और जोखिम पर निर्भर करती है।

The Hindi Post
Author: The Hindi Post