उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों के लिए चुनाव प्रचार बुधवार को थम गया। अब सभी की नजरें 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। इन चुनावों में बैलेट पेपर के जरिए वोट डाले जाएंगे। प्रचार के आखिरी दिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत लगाई। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हो रहे इन चुनावों को दोनों दलों के लिए अहम माना जा रहा है।
स्नातक और शिक्षक सीटों पर मुकाबला
इन 11 सीटों में पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। स्नातक सीटों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद आते हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों का दायरा प्रदेश के सभी 75 जिलों तक फैला है। हालांकि, इन चुनावों में हर व्यक्ति वोट नहीं डाल सकता। केवल संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के पंजीकृत और पात्र मतदाता ही मतदान कर सकते हैं।
BJP और सपा के उम्मीदवारों में सीधी टक्कर
कई निर्वाचन क्षेत्रों में BJP और सपा के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। लखनऊ में BJP के उमेश द्विवेदी के सामने सपा के सुशील कुमार पटेल हैं। मेरठ-गाजियाबाद में BJP के श्रीचंद शर्मा का मुकाबला सपा के नितिन कुमार तोमर से है। बरेली-मुरादाबाद में BJP के डॉ. हरिसिंह ढिल्लों और सपा के हाजी मोहम्मद दानिश अख्तर आमने-सामने हैं। वाराणसी में BJP के डॉ. प्रमोद मिश्रा और सपा के लाल बिहारी यादव के बीच मुकाबला है। वहीं, आगरा-अलीगढ़ और गोरखपुर-फैजाबाद में भी दोनों दलों ने अपनी ताकत झोंकी है।
योगी समेत BJP के दिग्गजों ने संभाला मोर्चा
इन चुनावों को गंभीरता से लेते हुए BJP ने व्यापक प्रचार अभियान चलाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत पार्टी के कई मंत्री और विधायक भी चुनाव प्रचार में जुटे रहे। दूसरी ओर, सपा ने भी अपने उम्मीदवारों की जीत के लिए पूरी ताकत लगाई। दोनों दलों की कोशिश शिक्षक और स्नातक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की है। यही वजह है कि इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत परखने का मौका माना जा रहा है।
पिछले चुनाव में सपा को मिली थीं छह सीटें
पिछले MLC चुनावों में इन 11 सीटों में से सपा ने छह और BJP ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में इस बार दोनों पार्टियों के सामने अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने की चुनौती है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं, क्योंकि इनमें सीमित और पंजीकृत मतदाता ही हिस्सा लेते हैं। इसके बावजूद इनका राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है। नतीजे यह संकेत दे सकते हैं कि दोनों दलों की पकड़ अपने पारंपरिक समर्थक वर्गों के बीच कितनी मजबूत है।
अखिलेश यादव का BJP पर गंभीर आरोप
चुनाव प्रचार के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने BJP और योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि BJP चुनाव जीतने के लिए अनुचित तरीकों का सहारा लेना चाहती है। अखिलेश का दावा है कि स्नातक MLC चुनाव से पहले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कथित धमकियों के जरिए शिक्षकों और स्नातकों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे BJP की हताशा बताया और मतदाताओं से सपा उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अब सबकी नजरें मतदान और 27 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर हैं।