Economic Affairs: कर्ज में डूबे पाकिस्तान को मिली बड़ी जिम्मेदारी, 2027 में IMF-वर्ल्ड बैंक की कमान संभालेगा, अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर रहेगी नजर

पाकिस्तान को साल 2027 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह (WBG) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की चेयरमैनशिप मिलने जा रही है। पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने इसकी घोषणा की है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकॉक में 2026 की सालाना बैठक के दौरान यह फैसला सामने आया। पाकिस्तान करीब 74 साल बाद इस पद पर लौटेगा। यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अपनी जरूरतों के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता पर निर्भर है।

1953 के बाद पाकिस्तान को मिली यह जिम्मेदारी

पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा को औपचारिक रूप से अगला चेयरमैन चुना गया है। वह विश्व बैंक में पाकिस्तान के गवर्नर भी हैं। मंत्रालय ने इस नियुक्ति को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। पाकिस्तान के मुताबिक, इस पद के जरिए उसे वैश्विक आर्थिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को दिशा देने का अवसर मिलेगा। साथ ही, सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में भी भूमिका निभाने का मौका मिलेगा।

बैंकॉक में हुई सालाना बैठक में घोषणा

IMF और विश्व बैंक समूह की सालाना बैठक 12 से 18 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हुई। इसमें 191 देशों के 15,000 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसी बैठक के पूर्ण सत्र के दौरान पाकिस्तान को 2027 की चेयरमैनशिप सौंपने की घोषणा की गई। यह पद दोनों संस्थानों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से जुड़ा है, जहां सदस्य देशों के प्रतिनिधि वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास से संबंधित अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

आर्थिक संकट के बीच मिली नई भूमिका

पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। देश को भुगतान संतुलन की जरूरतें पूरी करने और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए IMF की मदद लेनी पड़ रही है। ऐसे में चेयरमैनशिप मिलना पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस पद पर पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान का आर्थिक संकट अपने आप खत्म हो जाएगा। देश को अपनी आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए सुधार जारी रखने होंगे।

IMF के दो कार्यक्रमों पर निर्भर पाकिस्तान

पाकिस्तान फिलहाल IMF के दो वित्तीय कार्यक्रमों के तहत सहायता ले रहा है। पहला 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) है। इसका उद्देश्य देश की भुगतान संबंधी जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक सुधारों में मदद करना है। दूसरा 1.4 अरब डॉलर का रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) है। इसके तहत जलवायु संबंधी जोखिमों से निपटने और अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

अतिरिक्त 1.2 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद

पाकिस्तान को IMF से 1.2 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता भी मिल सकती है। हालांकि, इस रकम के भुगतान के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है। यह संभावना दोनों वित्तीय कार्यक्रमों की हालिया समीक्षा को लेकर IMF अधिकारियों और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच बनी सहमति के बाद सामने आई है। मंजूरी मिलने पर पाकिस्तान को आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन राशि मिलने की प्रक्रिया अभी अंतिम स्वीकृति पर निर्भर है।

क्या पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को होगा फायदा?

चेयरमैनशिप पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चर्चाओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर दे सकती है। इससे देश को वैश्विक विकास, वित्तीय सहयोग और आर्थिक चुनौतियों पर अपनी बात रखने का मंच मिलेगा। हालांकि, पाकिस्तान की वास्तविक आर्थिक स्थिति में सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कर्ज, वित्तीय घाटे और आर्थिक सुधारों जैसी चुनौतियों से कैसे निपटता है। नई जिम्मेदारी अहम है, लेकिन इससे आर्थिक संकट खत्म होने की गारंटी नहीं मिलती।

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Author: The Hindi Post