हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को बेहद पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। साल 2026 में नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई है और इसका समापन 19 अक्टूबर को महानवमी के साथ होगा। वहीं, 20 अक्टूबर को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन समय में जन्म लेने वाले बच्चों का जन्म परिवार के लिए सौभाग्य और खुशी का प्रतीक माना जाता है।
ऐसे बच्चों के स्वभाव को लेकर क्या मान्यता है?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में नवरात्रि को शक्ति, साहस, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व माना जाता है। इसी वजह से ऐसी धारणा है कि इन दिनों जन्म लेने वाले बच्चे आत्मविश्वासी, उत्साही और मजबूत इच्छाशक्ति वाले हो सकते हैं। माना जाता है कि वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत करते हैं और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने से पीछे नहीं हटते। हालांकि, बच्चे का वास्तविक स्वभाव उसकी परवरिश, अनुभवों और आसपास के माहौल से भी प्रभावित होता है।
आत्मविश्वास और साहस को माना जाता है खास गुण
मां दुर्गा को शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते नवरात्रि में जन्म लेने वाले बच्चों को साहसी और आत्मविश्वासी मानने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसे बच्चे जीवन में चुनौतियों का सामना करने की क्षमता रखते हैं और अपने फैसले लेने में आगे रहते हैं। हालांकि, ये बातें धार्मिक धारणाओं पर आधारित हैं। किसी बच्चे के व्यक्तित्व या भविष्य का निर्धारण केवल उसके जन्म के समय से नहीं किया जा सकता।
दूसरों की मदद करने का होता है भाव
नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ के साथ दान, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इसी कारण इस समय जन्म लेने वाले बच्चों को दयालु, संवेदनशील और दूसरों की मदद करने वाला मानने की मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि ऐसे बच्चे परिवार और दोस्तों के प्रति लगाव रखते हैं तथा जरूरत पड़ने पर दूसरों का साथ देते हैं। हालांकि, दया और सहयोग जैसे गुण बच्चों में परिवार के संस्कारों और जीवन के अनुभवों से भी विकसित होते हैं।
मां दुर्गा के आशीर्वाद से जुड़ी धार्मिक मान्यता
नवरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित है। इसलिए धार्मिक आस्था के अनुसार, इन दिनों जन्म लेने वाले बच्चों पर देवी मां की विशेष कृपा मानी जाती है। मां शैलपुत्री को दृढ़ता, मां ब्रह्मचारिणी को तप और संयम, मां चंद्रघंटा को साहस और मां स्कंदमाता को मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। इसी तरह मां कात्यायनी शक्ति, मां कालरात्रि निर्भयता, मां महागौरी पवित्रता और मां सिद्धिदात्री ज्ञान एवं सिद्धियों से जुड़ी हैं।
जन्म के दिन के अनुसार भी जुड़ी हैं मान्यताएं
नवरात्रि के हर दिन का अपना धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि जिस दिन बच्चे का जन्म होता है, उस दिन पूजी जाने वाली देवी के गुणों को उसके व्यक्तित्व से जोड़कर देखा जाता है। उदाहरण के लिए, मां कालरात्रि से निर्भयता और मां सिद्धिदात्री से ज्ञान की प्रेरणा ली जाती है। हालांकि, ये धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं। बच्चे का भविष्य उसकी शिक्षा, परवरिश, मेहनत और अवसरों पर भी निर्भर करता है।