भारत में अब तक ओलंपिक गेम्स का आयोजन नहीं हुआ है। इस इंतजार को खत्म करने के लिए भारत ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारत में ओलंपिक कराने की इच्छा जाहिर की है। इसके लिए खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ अपनी दावेदारी को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
भारत की दावेदारी की हुई पुष्टि
ओलंपिक की मेजबानी हासिल करने की प्रक्रिया आसान नहीं है। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) ने 2036 ओलंपिक के लिए भारत की दावेदारी की पुष्टि की है। इसका मतलब है कि भारत उन देशों में शामिल है, जो इन खेलों की मेजबानी के लिए आधिकारिक तौर पर रेस में हैं। अब आगे की प्रक्रिया में अलग-अलग दावेदारों का मूल्यांकन किया जाएगा।
इन देशों से भारत को मिलेगी चुनौती
2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत के अलावा जर्मनी, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, हंगरी, तुर्की और कतर भी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इनमें जर्मनी और दक्षिण कोरिया पहले ओलंपिक की मेजबानी कर चुके हैं। ऐसे में भारत को इन देशों के साथ अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए कई मानकों पर काम करना होगा।
अहमदाबाद पर टिकी भारत की उम्मीदें
भारत की ओर से अहमदाबाद को 2036 ओलंपिक के संभावित मेजबान शहर के तौर पर पेश किया जा रहा है। शहर में खेल सुविधाओं और जरूरी बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत की दावेदारी में अहमदाबाद की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही शहर ओलंपिक आयोजन के लिए मुख्य केंद्र के रूप में सामने आया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स भी अहम कड़ी
भारत ने 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए भी अहमदाबाद को चुना है। इसे 2036 ओलंपिक की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की मेजबानी से भारत को आयोजन क्षमता, खेल बुनियादी ढांचे और खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं को परखने का मौका मिल सकता है।
अब आगे क्या होगा?
ओलंपिक की मेजबानी के लिए सिर्फ दावेदारी पेश करना पर्याप्त नहीं होता। मेजबान देश को खेल सुविधाओं, परिवहन, खिलाड़ियों के रहने, सुरक्षा और दूसरे जरूरी इंतजामों से जुड़े कई मानकों को पूरा करना होता है। भारत की दावेदारी अब आगे की प्रक्रिया में इन पहलुओं पर केंद्रित रहेगी। 2036 के ओलंपिक की मेजबानी किस देश को मिलेगी, इसका फैसला आगे IOC की प्रक्रिया के तहत होगा।