चलने, सीढ़ियां चढ़ने या थोड़ा काम करने पर बार-बार सांस फूलना और थकान महसूस होना सिर्फ कमजोरी या उम्र का असर नहीं हो सकता। कुछ मामलों में ये दिल की नसों में ब्लॉकेज का संकेत भी हो सकते हैं। खासकर अगर मेहनत करने पर सीने में दर्द या दबाव महसूस हो और आराम करने पर परेशानी कम हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच कराने से गंभीर खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
लेफ्ट मेन आर्टरी का ब्लॉकेज गंभीर
दिल को लगातार काम करने के लिए पर्याप्त खून और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। कोरोनरी आर्टरी में कोलेस्ट्रॉल और दूसरे पदार्थ जमा होने से नसें संकरी हो सकती हैं और दिल की मांसपेशियों तक रक्त की सप्लाई कम हो सकती है। लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी खास होती है, क्योंकि इससे निकलने वाली शाखाएं दिल के बड़े हिस्से तक खून पहुंचाती हैं। इसलिए यहां गंभीर ब्लॉकेज को हल्के में नहीं लिया जाता।
हर मरीज में दर्द एक जैसा नहीं
हार्ट की बीमारी में हर व्यक्ति को तेज सीने का दर्द हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को सीने में भारीपन या दबाव महसूस हो सकता है, जबकि कुछ में सांस फूलना, असामान्य थकान या बेचैनी ही मुख्य शिकायत होती है। अगर चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर परेशानी बार-बार हो रही है और आराम करने से ठीक हो जाती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
मेहनत करने पर सीने में दर्द या दबाव, थोड़ी गतिविधि में ही थकान, सांस फूलना और दर्द का कंधे, हाथ, पीठ या जबड़े तक पहुंचना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को बार-बार गैस या कमजोरी मानकर टालना सही नहीं है। अचानक तेज सीने में दर्द, सांस लेने में गंभीर परेशानी या दूसरे गंभीर लक्षण हों, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
बायपास जरूरी है या एंजियोप्लास्टी?
अगर जांच में ब्लॉकेज मिलता है तो हर मरीज के लिए इलाज एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज की जगह, गंभीरता, प्रभावित धमनियों की संख्या और रक्त वाहिकाओं की स्थिति देखते हैं। इसके बाद दवाओं, एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी में से उचित विकल्प चुना जाता है। इसलिए किसी दूसरे मरीज के इलाज को देखकर खुद अपना इलाज तय करना सही नहीं है।
ब्लॉकेज का खतरा कैसे कम करें?
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि और परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास ब्लॉकेज का खतरा बढ़ा सकते हैं। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। धूम्रपान से बचें, वजन नियंत्रित रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्यायाम करें। खाने में ज्यादा नमक, ट्रांस फैट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कम रखना भी फायदेमंद है।