आजकल बच्चों का घंटों मोबाइल फोन में लगे रहना आम होता जा रहा है। चिंता की बात यह है कि कई बार माता-पिता बच्चों को फोन चलाते समय चिप्स, चॉकलेट और दूसरे पैकेट वाले फूड भी दे देते हैं। इसे प्यार जताने का आसान तरीका समझा जाता है, लेकिन लगातार स्क्रीन देखने और जंक फूड खाने की आदत बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।
स्क्रीन देखते हुए ज्यादा खा सकते हैं बच्चे
बच्चा जब मोबाइल देखते हुए खाना खाता है तो उसका ध्यान खाने पर नहीं रहता। ऐसे में उसे यह महसूस करने में परेशानी हो सकती है कि उसका पेट भर चुका है। नतीजा यह हो सकता है कि बच्चा जरूरत से ज्यादा खाना खा ले। विशेषज्ञ भी बच्चों में स्क्रीन के साथ खाने की इस आदत को चिंताजनक मानते हैं।
जंक फूड में नमक और फैट ज्यादा
चिप्स, पैकेट वाले स्नैक्स और कई दूसरे जंक फूड में नमक, चीनी और फैट की मात्रा अधिक हो सकती है। इनका बार-बार सेवन बच्चों के वजन और खान-पान की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक असंतुलित डाइट रहने पर मोटापे और आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बच्चों को ऐसे खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में देना बेहतर है।
मोबाइल से घट सकती है शारीरिक गतिविधि
बच्चे जितना ज्यादा समय मोबाइल पर बिताते हैं, उतना ही समय खेलकूद और दूसरी शारीरिक गतिविधियों से दूर हो सकते हैं। लगातार बैठकर स्क्रीन देखने और साथ में स्नैक्स खाने से शरीर की गतिविधि कम हो सकती है। इससे बच्चे के वजन, फिटनेस और रोजमर्रा की सक्रियता पर असर पड़ सकता है। बच्चों के लिए रोज पर्याप्त खेलना और सक्रिय रहना जरूरी है।
नींद पर भी पड़ सकता है असर
देर रात तक मोबाइल या दूसरी स्क्रीन देखने से बच्चों की नींद प्रभावित हो सकती है। स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल सोने के समय को पीछे कर सकता है और पर्याप्त नींद लेने में बाधा डाल सकता है। बच्चों के विकास के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है। इसलिए सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना और नियमित स्लीप रूटीन बनाना फायदेमंद हो सकता है।
माता-पिता अपनाएं ये आसान तरीके
बच्चों को खाना खिलाते समय मोबाइल या टीवी से दूर रखने की कोशिश करें। उनकी डाइट में घर का पौष्टिक खाना, फल, सब्जियां, दाल और दूसरे संतुलित खाद्य पदार्थ शामिल करें। चिप्स और चॉकलेट जैसे पैकेट वाले फूड को रोज की आदत न बनने दें। साथ ही बच्चों को रोज खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय दें। सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता खुद भी स्क्रीन-फ्री मील की आदत अपनाकर बच्चों के सामने अच्छा उदाहरण पेश करें।