मृत्यु के बाद परिवार में शोक का माहौल होता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान कई तरह के नियम बताए गए हैं। गरुड़ पुराण में मृत्यु, आत्मा की यात्रा और मृतक से जुड़े कर्मों का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसी आधार पर मृत व्यक्ति की कुछ निजी वस्तुओं को लेकर भी सावधानी बरतने की मान्यता है। हालांकि, इनमें से कई बातें धार्मिक मान्यताओं और लोक-परंपराओं पर आधारित हैं।
मृतक के कपड़े पहनने से बचें
धार्मिक मान्यता के अनुसार मृत व्यक्ति के कपड़े परिवार के सदस्यों को इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। माना जाता है कि कपड़ों के साथ मृतक की यादें और भावनात्मक जुड़ाव जुड़े रहते हैं। इसलिए साफ कपड़ों को जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा कई परिवारों में अपनाई जाती है। खराब या अनुपयोगी कपड़ों को उचित तरीके से नष्ट किया जा सकता है।
घड़ी और निजी वस्तुओं का क्या करें
मृतक की घड़ी, कंघी, रेजर, शेविंग किट, चश्मा या ऐसी दूसरी बेहद निजी चीजों को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं हैं। परंपरा में इन्हें सीधे इस्तेमाल करने से बचने की बात कही जाती है। परिवार चाहे तो ऐसी वस्तुओं को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे सकता है। वहीं, ऐसी चीजें जिन्हें स्वास्थ्य या स्वच्छता के कारण साझा करना उचित नहीं है, उन्हें इस्तेमाल न करना बेहतर है।
गहनों को लेकर भी बताई गई सावधानी
मृत व्यक्ति के गहने परिवार में अक्सर भावनात्मक विरासत बन जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन्हें सीधे पहनने के बजाय शुद्ध करके इस्तेमाल करने या उनका नया रूप बनवाने की परंपरा बताई जाती है। कई परिवार गहनों को पिघलवाकर नए आभूषण बनवा लेते हैं। कुछ लोग इन्हें धार्मिक कार्यों या दान में भी देने का विकल्प चुनते हैं।
जूते-चप्पल और बिस्तर का क्या करें
मृतक के जूते-चप्पल, बिस्तर, गद्दे और तकिए जैसी चीजों को लेकर भी परंपरागत रूप से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता में इन्हें घर में लंबे समय तक रखने से बचने की बात कही जाती है। साफ और उपयोगी सामान जरूरतमंदों को दिया जा सकता है। हालांकि, हर परिवार अपनी परिस्थितियों और परंपरा के अनुसार निर्णय ले सकता है।
मोबाइल और दूसरी चीजों का इस्तेमाल
मोबाइल, डायरी, बैग या दूसरी निजी वस्तुओं को लेकर भी कई परिवार धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हैं। ऐसी चीजों को तुरंत फेंकना जरूरी नहीं है। परिवार चाहे तो महत्वपूर्ण डेटा सुरक्षित करके मोबाइल को रीसेट कर सकता है और आगे इस्तेमाल कर सकता है। मृतक की जरूरी वस्तुओं को संभालकर रखना भी स्मृति के तौर पर एक विकल्प है।
दान या पुनः उपयोग को माना जाता है विकल्प
मृत व्यक्ति की वस्तुओं को लेकर धार्मिक परंपराओं में दान को महत्वपूर्ण माना गया है। कपड़े, बिस्तर और उपयोगी सामान जरूरतमंदों को देना एक प्रचलित तरीका है। वहीं धातु के गहनों को नए रूप में ढालकर इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखना जरूरी है कि गरुड़ पुराण के नाम पर बताई जाने वाली हर बात मूल ग्रंथ में शब्दशः लिखी हो, यह जरूरी नहीं; इसलिए इन्हें धार्मिक मान्यता और परंपरा के रूप में समझना उचित है।