सितंबर में मानसून धीरे-धीरे खत्म होने लगता है और मौसम सर्दियों की ओर बढ़ता है। इस दौरान कभी तेज धूप, तो कभी अचानक बादल और ठंडी हवाएं तापमान में बदलाव करती हैं। बारिश के कारण वातावरण में नमी भी बढ़ जाती है। ऐसे बदलते मौसम का असर शरीर पर पड़ सकता है और सर्दी, जुकाम, गले में खराश, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
सुबह गला सूखना क्यों बढ़ जाता है?
बदलते तापमान और हवा में नमी के बदलाव से गले में सूखापन या खराश महसूस हो सकती है। रात में मुंह से सांस लेने या कमरे की सूखी हवा के कारण सुबह गला ज्यादा सूखा लग सकता है। इसलिए कमरे का तापमान सामान्य रखें और कोशिश करें कि सांस हमेशा नाक से लें। इससे गले में जलन और सूखेपन की समस्या कम हो सकती है।
गले की खराश में अपनाएं ये आसान उपाय
अगर मौसम बदलने के कारण हल्की खराश, गला सूखने या खांसी की समस्या हो रही है तो पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं। सुबह भाप लेने से भी नाक और गले में जमा कफ से राहत मिल सकती है। जरूरत महसूस हो तो रात में सोने से पहले भी भाप ली जा सकती है। हालांकि, बहुत गर्म भाप से बचें और सावधानी बरतें।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अगर खांसी लगातार बनी रहे, सांस लेने में परेशानी हो या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य मौसमी समस्या मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना जरूरी है। वायरल संक्रमण की आशंका होने पर बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों से दूरी रखना भी संक्रमण फैलने का खतरा कम कर सकता है।
बदलते मौसम में खानपान रखें हल्का और ताजा
इस दौरान खानपान पर खास ध्यान देना जरूरी है। घर का बना ताजा, हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाएं। बहुत ज्यादा तला-भुना, फैट वाला, जंक और पैक्ड फूड कम करें। खाने में अदरक, लहसुन, जीरा, अजवाइन और हल्दी जैसे मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये भारतीय खानपान का हिस्सा हैं और भोजन का स्वाद भी बढ़ाते हैं।
पानी और दिनचर्या से सेहत रहेगी बेहतर
बदलते मौसम में शरीर को पर्याप्त पानी देना जरूरी है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में सामान्य तापमान या गुनगुना पानी पीते रहें। मौसम के अनुसार कपड़े पहनें और अचानक तापमान बदलने से खुद को बचाएं। अच्छी नींद, संतुलित भोजन और साफ-सफाई जैसी रोजमर्रा की आदतें भी मौसमी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में मदद कर सकती हैं।