भारतीय एथलीट सीमा कुमारी ने 2026 एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 10,000 मीटर रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। उन्होंने 32:41.54 का समय निकाला। यह एशियन गेम्स में सीमा का पहला मेडल है। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं की 10,000 मीटर इवेंट में भारत के 16 साल लंबे मेडल के इंतजार को भी खत्म कर दिया।
12 साल की उम्र में पिता को खोया
सीमा का जन्म 10 जनवरी 2001 को हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ। जब वह सिर्फ 12 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गईं। सीमा ने खेती-बाड़ी और मवेशी चराने जैसे कामों में परिवार का हाथ बंटाया। मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने दौड़ना नहीं छोड़ा।
जूते नहीं थे तो नंगे पैर दौड़ीं
सीमा के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि उनके पास दौड़ने के लिए जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने हिमाचल की पहाड़ी पगडंडियों पर नंगे पैर दौड़कर अभ्यास किया। उनकी मां ने भी बेटी के सपनों को पूरा करने में पूरा साथ दिया। इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने का खर्च उठाने के लिए मां ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी तक खर्च कर दी।
2017 से शुरू हुआ इंटरनेशनल सफर
सीमा ने 2017 में इंटरनेशनल स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू की। बैंकॉक में एशियन अंडर-18 चैंपियनशिप की 3000 मीटर रेस में उन्होंने 10:05.27 के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स, एशियन जूनियर चैंपियनशिप और ब्यूनस आयर्स यूथ ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों में हिस्सा लिया।
क्रॉस कंट्री से लेकर यूनिवर्सिटी गेम्स तक
अक्टूबर 2024 में हॉन्गकॉन्ग में हुई एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में सीमा ने 37:20 के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। 2025 में एशियन चैंपियनशिप की 10,000 मीटर रेस में वह छठे स्थान पर रहीं। इसके बाद वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में 5000 मीटर में 15:35.86 का सीजन-बेस्ट समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
संघर्ष से सफलता तक पहुंची सीमा
सीमा की कहानी सिर्फ एक एथलीट की जीत नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में सपने देखने और उन्हें पूरा करने की कहानी है। बचपन में पिता को खोने से लेकर आर्थिक तंगी के बीच नंगे पैर अभ्यास करने तक, उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। अब एशियन गेम्स के पोडियम पर ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सीमा ने अपने लंबे संघर्ष को एक ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया है।