अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। पेंटागन के ताजा अनुमान के मुताबिक, 3 सितंबर 2026 तक Operation Epic Fury पर करीब 43.6 अरब डॉलर खर्च का अनुमान है। इसमें ऑपरेशन की लागत, इस्तेमाल हुए हथियारों को दोबारा जुटाने और युद्ध में खोए उपकरणों को बदलने का खर्च शामिल है।
हथियारों पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च हुआ
इस खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किए गए हथियारों और सैन्य सामग्री को फिर से जुटाने का है। पेंटागन के आकलन के मुताबिक करीब 28.1 अरब डॉलर के हथियारों को बदलने की जरूरत है, जबकि लगभग 4.3 अरब डॉलर उपकरणों के नुकसान से जुड़े हैं। यह आंकड़ा आगे के आकलन के साथ बदल सकता है।
CBO ने भी अरबों डॉलर का अनुमान दिया
अमेरिकी कांग्रेस की गैर-दलीय संस्था Congressional Budget Office यानी CBO ने 1 अगस्त 2026 तक युद्ध की लागत करीब 38 अरब डॉलर आंकी थी। CBO ने कहा था कि संघर्ष जारी रहने पर हर महीने अरबों डॉलर का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। हथियारों के खाली हुए भंडार को फिर भरने में भी कई साल लग सकते हैं।
सऊदी अरब के साथ बढ़े बड़े हथियार सौदे
इसी दौरान अमेरिका ने सऊदी अरब के लिए कई बड़े संभावित हथियार सौदों को मंजूरी दी है। इनमें मिसाइल, गोला-बारूद, टैंक इंजन और दूसरे सैन्य उपकरण शामिल हैं। सितंबर में सबसे बड़ी चर्चा 48 F-35 लड़ाकू विमानों और 49 इंजनों की संभावित 24.3 अरब डॉलर की बिक्री को लेकर हुई।
44 अरब डॉलर के आंकड़े का क्या मतलब है
जनवरी से सितंबर के बीच बताए गए प्रमुख संभावित सौदों को जोड़ने पर रकम करीब 44 अरब डॉलर के आसपास पहुंचती है। लेकिन इसे अमेरिका के युद्ध खर्च की सीधी वसूली कहना सही नहीं होगा। ये मुख्य तौर पर संभावित Foreign Military Sales हैं, जिनकी मंजूरी, भुगतान और डिलीवरी अलग-अलग समय पर हो सकती है।
युद्ध का असली आर्थिक असर अभी बाकी
कागज पर युद्ध का अनुमानित खर्च और सऊदी के संभावित हथियार सौदों की रकम लगभग बराबर दिखती है, लेकिन दोनों को सीधे जोड़ना उचित नहीं है। युद्ध में इस्तेमाल हथियारों की भरपाई, सैन्य उपकरणों का नुकसान और भविष्य की लागत अभी भी अमेरिका के सामने है। वहीं, सऊदी के हथियार सौदे अलग रक्षा जरूरतों और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात से जुड़े हैं।