सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड खाद्य पदार्थों में ज्यादा नमक, चीनी और वसा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि लोगों, खासकर बच्चों की सेहत को लेकर यह गंभीर मुद्दा है। अदालत ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी पक्षों से राष्ट्रीय हित में फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FOPL) लागू करने के मुद्दे पर विचार करने की अपील की है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
पैकेट के आगे चेतावनी लेबल लगाने पर जोर
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने FSSAI से पूछा कि पैक्ड फूड की पोषण संबंधी जानकारी आमतौर पर पैकेट के पीछे दी जाती है, लेकिन क्या ऐसे स्पष्ट नियम हैं जिनसे किसी उत्पाद को हाई शुगर, हाई साल्ट या हाई फैट बताया जा सके। FSSAI ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोषण संबंधी जानकारी आमतौर पर प्रति 100 ग्राम और प्रति सर्विंग के आधार पर दी जाती है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर अलग चेतावनी की मांग
सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के लिए ज्यादा स्पष्ट चेतावनी की जरूरत बताई। उनका कहना था कि कुरकुरे जैसे उत्पादों को अंडे या नमकीन काजू जैसे खाद्य पदार्थों के साथ एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं है। उन्होंने ऐसे खाद्य पदार्थों के लिए अलग रंग के चेतावनी लेबल का सुझाव दिया। कोर्ट ने इस सुझाव को रिकॉर्ड पर लिया।
FSSAI ने बताया लाल लेबल का प्रस्ताव
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अनुपालन हलफनामे में लाल रंग के FOPL चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अगर किसी पैक्ड फूड में अतिरिक्त संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी और नमक में से दो या उससे ज्यादा पोषक तत्व तय सीमा से अधिक हैं, तो पैकेट के सामने लाल रंग का षटभुज आकार का चेतावनी लेबल लगाया जा सकता है। इसका मकसद ग्राहक को तुरंत जानकारी देना है।
कोर्ट ने देरी पर FSSAI को लगाई फटकार
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी पैक्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल लागू करने में देरी को लेकर FSSAI को फटकार लगा चुका है। अदालत ने केंद्र से FOPL के स्वरूप पर फैसला लेने को कहा था। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या भारत को विकसित देशों में लागू अंतरराष्ट्रीय मानकों से पीछे रहना चाहिए। अदालत ने FOPL को लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी बताया।
बच्चों और मोटापे को लेकर बढ़ी चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर बच्चों में बढ़ती जंक फूड की आदत और मोटापे को लेकर चिंता जताई है। अदालत का मानना है कि उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही आसान और साफ जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे बेहतर खाद्य विकल्प चुन सकें। अब कोर्ट इस मामले में संबंधित पक्षों से और जानकारी लेने के बाद विस्तृत आदेश जारी कर सकती है। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।