मध्य प्रदेश के सतना जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से हालात बेहद खराब हो गए हैं। कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं। नदी-नाले उफान पर हैं, सड़कें और रेलवे ट्रैक पानी में डूब गए हैं। कई गांवों का संपर्क भी टूट गया है। सबसे ज्यादा असर चित्रकूट में देखने को मिल रहा है, जहां मंदाकिनी नदी का जलस्तर करीब 30 फीट तक पहुंच गया है।
चित्रकूट में रातभर चला रेस्क्यू
चित्रकूट में बाढ़ के बीच राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। घरों और होटलों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए SDRF की टीमें लगातार काम कर रही हैं। सेना के हेलीकॉप्टर भी चित्रकूट पहुंच चुके हैं। हेलीकॉप्टर की मदद से रात में भी लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन ने आसपास के करीब 36 गांवों में हाई अलर्ट जारी किया है।
रामघाट और भरतघाट पूरी तरह डूबे
भारी बारिश और नदी के तेज बहाव के कारण रामघाट और भरतघाट पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। घाटों के आसपास की करीब 400 दुकानें भी बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। पानी नयागांव राजमहल के अंदर तक पहुंच गया है। मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट का करीब 300 मीटर लंबा और 25 फीट ऊंचा पुल भी तेज बहाव में बह गया।
कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला
सतना के मझगवां थाना क्षेत्र में भी कई लोग बाढ़ के पानी में फंस गए थे। रेस्क्यू टीम ने घरों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद पिंडरा के पास नदी में फंसे दो ट्रक ड्राइवरों को भी रस्सी और लाइफ जैकेट की मदद से बचाया गया। कुल 16 लोगों के रेस्क्यू के बाद SDRF और होमगार्ड की टीम को तत्काल चित्रकूट भेज दिया गया।
बांध टूटने से कई इलाकों में पानी
सतना जिले में गोरगी बांध टूटने के बाद कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है। सतना-चित्रकूट मार्ग तीन जगहों पर बंद हो चुका है। कई मोहल्लों में लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। नागौद में थाना परिसर और पेट्रोल पंप तक पानी पहुंच गया। कोठी क्षेत्र में मकान गिरने से चार भैंसें दब गईं, जिनमें दो की मौत हो गई।
सेना और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
पन्ना जिले में भी बाढ़ के कारण कई गांव टापू में बदल गए हैं। बानसुजारा बांध के आठ गेट खोल दिए गए हैं और धसान नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। बिगड़ते हालात के बीच प्रशासन, SDRF, होमगार्ड और सेना की टीमें लगातार राहत-बचाव में जुटी हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है।