त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। एक दिन पहले यह 63.97 रुपये थी। यानी सिर्फ एक दिन में कीमत में 1 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।
एक महीने में कीमतों में बड़ा उछाल
चीनी की मौजूदा कीमत पिछले महीने के मुकाबले काफी ज्यादा है। एक महीने पहले औसत खुदरा कीमत 48.68 रुपये प्रति किलोग्राम थी। अब यह करीब 34 फीसदी बढ़ चुकी है। वहीं, पिछले साल इसी समय चीनी का औसत भाव 46.27 रुपये था। बुधवार को अधिकतम खुदरा कीमत 76 रुपये और सबसे आम कीमत 65 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
मिलों से चीनी सस्ती, फिर रिटेल महंगा
दिलचस्प बात यह है कि चीनी की मिल-गेट कीमतों में हाल में गिरावट आई है, लेकिन इसका फायदा अभी आम ग्राहकों को नहीं मिला है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक, सरकार के कदमों के बाद मिल-गेट कीमत करीब 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। पिछले सप्ताह यह 67 रुपये तक पहुंच गई थी।
थोक बाजार में भी बढ़ी कीमत
खुदरा बाजार के साथ थोक कीमतों में भी तेजी देखी गई है। बुधवार को चीनी की औसत थोक कीमत 60.36 रुपये प्रति किलोग्राम रही। एक महीने पहले यह 45.34 रुपये और एक साल पहले 43.02 रुपये थी। सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है।
सरकार ने उठाए कई बड़े कदम
चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने डीलरों और बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक लिमिट लागू की है। इसमें पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। सरकार ने सट्टेबाजी और जमाखोरी पर कार्रवाई शुरू की है। इसके अलावा चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है, ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बना रहे।
उत्पादन और स्टॉक पर भी नजर
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक, 2025-26 मार्केटिंग ईयर में इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी इस्तेमाल करने के बाद कुल उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। शुरुआती स्टॉक करीब 50 लाख टन था, जबकि घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने की उम्मीद है। खराब मौसम और कीड़ों के हमले से गन्ने की फसल प्रभावित होने के कारण उत्पादन का अनुमान पहले के मुकाबले घटाया गया है।