साल 2026 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त, शुक्रवार को लगने जा रहा है। खगोलीय गणना के मुताबिक यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। भारतीय समय के अनुसार इसकी आंशिक अवस्था सुबह करीब 8:04 बजे शुरू होकर 11:21 बजे तक चलेगी। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा।
भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण
भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण आम लोगों के लिए इससे जुड़े कई पारंपरिक नियम लागू नहीं होंगे। फिर भी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में चंद्र ग्रहण को महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान वातावरण और मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए लोग शांति बनाए रखने और सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
पूजा-पाठ और शुभ काम से बचें
धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट बंद रखने और सामान्य पूजा-पाठ न करने की मान्यता है। इस दौरान कोई नया शुभ या मांगलिक काम शुरू करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। इसके बजाय ध्यान, मंत्र जाप और ईश्वर का स्मरण करने को बेहतर माना जाता है। जरूरी शुभ कार्य ग्रहण के बाद करने की परंपरा है।
ग्रहण के समय खाने-पीने को लेकर नियम
चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं हैं। परंपरा के अनुसार ग्रहण शुरू होने से पहले भोजन कर लेना चाहिए और ग्रहण की अवधि में खाने-पीने से बचना चाहिए। हालांकि बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों के लिए स्वास्थ्य सबसे जरूरी है। उन्हें जरूरत के अनुसार खाना और दवा लेनी चाहिए।
गुस्से और नकारात्मक सोच से रहें दूर
ग्रहण के दौरान मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय किसी से बहस करना, गुस्सा करना या तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल होना ठीक नहीं माना जाता। इसलिए इस अवधि में शांत रहना, ध्यान करना और सकारात्मक विचारों पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है।
चंद्र ग्रहण को लेकर क्यों हैं मान्यताएं
हिंदू परंपरा में चंद्रमा का संबंध मन और भावनाओं से माना जाता है। इसी वजह से चंद्र ग्रहण के दौरान मानसिक शांति बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। ज्योतिष में भी ग्रहण को ग्रह-नक्षत्रों में बदलाव से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, इनका वैज्ञानिक आधार अलग विषय है। सामान्य जीवन में स्वास्थ्य और वैज्ञानिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है।